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राज्यसभा में अटका तीन तलाक बिल, कांग्रेस बोली- पति जेल में तो क्या खाना सरकार खिलाएगी

Fri, 05 Jan 2018 04:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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gulam nabi azad
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राज्यसभा में पेश तीन तलाक बिल यानि मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2017 बृहस्पतिवार को भी न तो पारित हुआ और न ही विपक्ष की मांग पर सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया। 

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बिल पर विपक्ष की ओर से पेश दोनों संशोधनों को सरकार ने नियम-कानूनों का हवाला देकर असंवैधानिक ठहराया है। जबकि उपसभापति पीजे कुरियन ने विपक्ष के संशोधनों को सभापति वैंकेया नायूड का फैसला बता उसे वैध बताया।

उपसभापति ने संशोधनों को सदन की सम्पत्ति बताया। तीन तलाक बिल राज्यसभा की कार्यवाही में तो शामिल नहीं हुआ लेकिन इसे कार्यसूची में शामिल करने न करने को लेकर दो बार गरमागरम बहस हुई। विपक्ष इसे सदन में लाकर सेलेक्ट कमेटी में भेजने या फिर मतविभाजन की मांग करता रहा। 
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विपक्ष के दोनों संशोधन प्रस्ताव नियम के मुताबिक अवैध
राज्यसभा में देर शाम जब विपक्ष ने इसे सदन की कार्यवाही में शामिल करने की मांग उठाई तो नेता सदन अरुण जेटली ने सरकार की मंशा साफ कर दी। उन्होंने उपसभापति से नियमों को हवाला देकर दोनों संशोधन प्रस्तावों को अवैध बताया।

उन्होंने फिर दोहराया कि बिल को सेलेक्ट कमेटी में ले जाने के लिए 24 घंटे पहले की नोटिस देने प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। सदस्यों के मौखिक नाम देकर से पेश प्रस्ताव की संसदीय परिपाटी नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें सभी दलों का प्रतिनिधित्व भी नहीं है। इसमें एक पक्ष यानि विपक्ष के नाम ही शामिल हैं। दूसरी आपत्ति ये है इसमें ऐसा कोई सदस्य शामिल नहीं हो सकता है जो बिल के खिलाफ होगा। उन्होंने उपसभापति से कहस कि इस विषय में अपनी रूलिंग दें।

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सभापति ने ठहराया है वैध, सदन की सम्पत्ति

उपसभापति पीजे कुरियन एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच फंसते दिखे और किसी भी प्रकार रूलिंग देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं कल की बात दोहराना चाहता हूं कि दोनों संशोधनों को सभापति ने स्वीकार कर वैध माना है।

संशोधनों में कोई तकनीकी खामी है तो राज्यसभा सचिवालय को देखना चाहिए था। बावजूद मैं ये मानकर चल रहा हूं कि इसे सभापति की स्वीकृति मिली है। उन्होंने कहा कि नियम 230 के तहत सभापति चाहें तो 24 घंटे पहले नोटिस की आवश्कता नहीं है। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। सभापति के फैसले पर कोई रूलिंग नहीं दूंगा।

​मैंने नेता सदन की बात सुनी लेकिन नियम स्पष्ट है संशोधन प्रस्ताव के रूप में हैं। प्रस्ताव रख दिया गया है लिहाजा सदन की सम्पत्ति हो गई है। जहां तक विधेयक को सदन की कार्यवाही में शामिल करने का सवाल है इसका निर्णय सरकार को करना है। इसकी प्राथमिकता सरकार तय करेगी कि किस विधेयक को पहले लाएं। अभी सहमति नहीं बनती दिख रही है। 

टीएमसी के वेल आने पर सदन स्थगित 
उपसभापति ने संसदीय कार्यराज्य मंत्री विजय गोयल के कहने पर जीएसटी बिल को पेश करने को कहा लेकिन तीन तलाक पर एक संशोधन लेकर आए सुखेंदु शेखर राय की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नाराज सदस्य वेल में आ गए और महिलाओं को शक्ति दो के नारे लगाने लगे।

सुखेंदु शेखर ने जेटली के सवाल पर कि विपक्ष ने सत्तापक्ष के सदस्यों को नाम प्रस्ताव में शामिल नहीं किया है पर कहा जब सरकार इसे पारित कराना चाहती थी और सेलेक्ट कमेटी में नहीं ले जाना चाहती है तो उसके सदस्यों के नाम कैसे शामिल होते। वहीं आनंद शर्मा ने भी स्पष्ट किया उन्होंने विपक्षी दलों के सदस्यों के नामों के साथ प्रस्ताव में और सदन में ये कहा है कि सरकार एनडीए सदस्यों के नाम दे। नरेश अग्रवाल ने उपसभापति से कहा कि आपने बुधवार को कहा था कि सदन अव्यवस्थित होने की वजह से मतविभाजन नहीं करा रहे हैं आज करा लें। 

पति जेल में तो क्या खाना सरकार खिलाएगी
विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा गतिरोध समाप्त हो सकता है और हम सरकार की मदद कर रहे हैं। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि तीन तलाक के खिलाफ पूरा सदन है। हम मुस्लिम महिलाओं के हित की बात कर रहे हैं। जब सरकार खुद को उनका हितैषी बता रही है तो इस प्रावधान का क्या होगा जो बिल है।

अगर तलाकशुदा महिलाओं के पति जेल चले जाएंगे तो उन्हें खाना क्या सरकार खिलाएगी। महिलाओं और बच्चों का खर्चा कौन उठाएगा। इसका प्रावधान बिल में नहीं है। इस पर उपसभापति ने टोका कि बिल के गुण दोष पर चर्चा न करें।
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