आज देशभर में 76वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो मुख्य अतिथि के तौर पर भारत आए हैं। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए केरल के मन्नान समुदाय के राजा रमन राजमन्नन को भी आमंत्रित किया गया है। अनुसुचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री केलू ने आदिवासी राजा को गणतंत्र दिवस का निमंत्रण सौंपा। पहली बार कोई आदिवासी राजा दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हो रहा है। रमन राजमन्नन अपनी पत्नी बिनुमोल के साथ इस समारोह शमिल हुए।
अपनी पत्नी के साथ दिल्ली पहुंचे आदिवासी राजा
आदिवासी राजा और उनकी पत्नी बुधवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। वे गणतंत्र दिवस परेड के बाद विभिन्न स्थानों का दौरा करेंगे और दो फरवरी को वापस केरल लौटेंगे। मंत्री केलू ने सोशल मीडिया पोस्ट पर बताया कि उनकी यात्रा का खर्च अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा किया जाएगा। उन्होंने विशेष मौके को चिह्नित करते हुए हेडगियर (थलप्पावु) और पारंपरिक कपड़े पहने। इस समारोह के दौरान दो मंत्रियों और सैनिकों द्वारा उनकी सहायता की जाएगी।
2012 में संभाली थी बागडोर
राजमन्नन इडुक्की जिले की 48 बस्तियों में रहने वाले आदिवासी कबीले मन्नान के 300 परिवारों के मुखिया हैं। वे मन्नान समुदाय के अनुष्ठानों और उत्सवों में एक विशेष स्थान रखते हैं। उन्होंने 2012 में आर्यन राजमन्नन की मृत्यु के बाद अपने छोटे से साम्राज्य की बागडोर संभाली। अर्थशास्त्र में स्नातक करने के बावजूद राजमन्नन एक किसान के रूप में साधारण जीवन जी रहे हैं। उनके पास न तो कोई शाही महल है और न ही रथ। वे एक साधारण से घर में रहते हैं और अपने परिवार के साथ मिलकर एक मंदिर का प्रबंधन करते हैं।
राजा के पास नागरिक समाज में कोई अधिकार या कर्तव्य नहीं है, लेकिन वह चार उप राजाओं (प्रतिनिधि), एक इलियाराजा (राजकुमार) और 50 सदस्यीय मंत्रिपरिषद की मदद से सामुदायिक मामलों की देखरेख करता है, जिन्हें कानिस कहा जाता है। मन्नान समुदाय मातृसत्तात्मक व्यवस्था का पालन करता है, जिसका अर्थ है कि महिलाएं विरासत का अधिकार रखती हैं।
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