रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि यह टीम मुंबई से सेशेल्स और फिर वापस मुंबई तक करीब 4,000 समुद्री मील का सफर तय करेगी। यह अभियान नारी शक्ति की ताकत को दर्शाता है और समुद्री क्षेत्रों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना की 12 महिला अधिकारियों की एक त्रि-सेना टीम ने सोमवार को मुंबई से सेशेल्स के लिए 55 दिन की लंबी समुद्री यात्रा की शुरुआत की। ये साहसी यात्रा भारतीय सशस्त्र नौकायन पोत (आईएएसवी) त्रिवेणी पर की जा रही है। इस ऐतिहासिक अभियान को कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग (सीएमई) के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल ए. के. रमेश ने मुंबई के कोलाबा स्थित इंडियन नेवल वॉटरमैनशिप ट्रेनिंग सेंटर से रवाना किया।
2026 के बड़े अभियान की तैयारी
यह यात्रा 2026 में होने वाले एक और भी बड़े वैश्विक नौकायन अभियान की तैयारी के तौर पर देखी जा रही है। इस टीम में शामिल 12 महिला अधिकारियों को 41 उत्साही स्वयंसेवकों में से चुना गया है। इन सभी ने बीते दो वर्षों तक समुद्र में नौकायन की कठिन ट्रेनिंग ली है।
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कई चुनौतियों से पार पाई टीम
इन महिला अधिकारियों ने कई छोटी-बड़ी अभ्यास यात्राएं की हैं, जिनमें दिन और रात की समुद्री यात्रा भी शामिल थी। इन्हें कई बार खराब मौसम, नौका की तकनीकी दिक्कतों और शारीरिक थकान जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर बार हिम्मत और हौसले के साथ इन पर विजय पाई।
नारी शक्ति को सलाम
यह यात्रा भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के बढ़ते योगदान का प्रतीक है। साथ ही यह रानी वेलु नचियार, रानी दुर्गावती और रानी लक्ष्मीबाई जैसी भारत की महान योद्धा रानियों को एक श्रद्धांजलि भी है, जिनकी वीरता आज भी देश को प्रेरणा देती है।
30 मई को समापन समारोह
इस ऐतिहासिक यात्रा का समापन 30 मई को होगा, जब यह टीम सफलतापूर्वक मुंबई लौटेगी और एक भव्य फ्लैग-इन सेरेमनी का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान देश की बेटियों के साहस, संकल्प और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है, जो साबित करता है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं — चाहे वो थल हो, नभ हो या जल।