साइबर अपराधियों ने कोरोना की लड़ाई के वक्त को अपने लिए बहुत अनुकूल माना है।फ्रॉड करने के मकसद से कोरोना के नाम पर भारत में अभी तक 2700 से ज्यादा डोमेन रजिस्टर हुए हैं। ये हर भाषा में हैं। मास्क, पीपीई, दवा और दूसरे उपकरणों के लिए बोगस वेबसाइट बनाकर लोगों को ठगा जा रहा है। ले.जन राजेश पंत के अनुसार, इस बाबत लोगों को सचेत होना होगा। सुरक्षा एजेंसियां अपने स्तर पर काम कर रही हैं। इंडिया कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉंस टीम (सीईआरटी) और बैंकिंग स्टाफ ऐसे फ्रॉड रोकने के लिए दिन-रात लगे हैं।सीईआरटी द्वारा एडवायजरी भी जारी की गई है।
कोरोना की दवा, गाइडलाइन या डिजिटल ट्रांजेक्शन, सब पर अपराधियों की नजर
पवन दुग्गल बताते हैं, डोनेशन से जुड़ी साइटों, कोरोना के इलाज, डब्लूएचओ की गाइडलाइन या फिर डिजिटल ट्रांजेक्शन, इन सब पर साइबर अपराधियों की नजर है।साइबर अपराधियों की ओर से ऐसे मेल आ रहे हैं, जिनमें देखने को मिलता है कि भारत सरकार ने कोरोना की लड़ाई के लिए कौन से कदम उठाए हैं, डब्लूएचओ की ताजा रिपोर्ट क्या है, कोरोना कहां पर तेजी से फैल रहा है और क्या आप मास्क-पीपीई खरीदना चाहते हैं, आदि। जो कोई मेल को क्लिक कर देता है वो फंस जाता है। वैसे भी भारत में फ़िशिंग एक दंडनीय अपराध नहीं है। मामलों की अंडर रिपोर्टिंग हो रही है।ऐसे अपराधों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के शिकायत पोर्टल हैं, लेकिन अब वहां गंभीरता से मामलों की जांच नहीं हो रही।
सरकारी-प्राइवेट अस्पताल भी निशाने पर
पवन दुग्गल के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों को पैसा दे रही है। इसके चलते सरकारी और प्राइवेट अस्पताल भी निशाने पर हैं। साइबर अपराधी केंद्र सरकार के नाम पर ई-मेल भेजकर पूछते हैं कि आपके यहां क्या क्या सुविधाएं हैं।सरकार आपको ये सुविधा मुहैया कराने पर विचार कर रही है।ऐसे में साइबर अपराधी आसानी से अस्पतालों के नेटवर्क में सेंध लगा रहे हैं। पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल अभी संसद में विचाराधीन है।सांसद मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता में गठित जेपीसी इसके प्रावधानों पर गौर कर रही है।