सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों, जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक प्रेस वार्ता में कई मुद्दों को उठाया था जिनमें अहम और संवेदनशील जनहित याचिकाओं के आवंटन का मुद्दा भी शामिल था।
जजों ने चीफ जस्टिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि वह अहम मामलों को पसंदीदा पीठों में भेज रहे हैं। लोया केस में सुप्रीम कोर्ट में जो याचिकाएं दायर हैं, उन पर पहले जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करने वाली थी लेकिन बाद में उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया।
वरिष्ठ जजों की वार्ता से नाखुश हैं कई जज
सूत्रों का कहना है कि जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका के संकट को खत्म करने के लिए चीफ जस्टिस से बात की है। ये सभी भविष्य में सीजेआई पद के दावेदार हैं। हालांकि ये जज इस बात से भी नाखुश हैं कि 4 सबसे वरिष्ठ जजों ने प्रेस वार्ता कर अपनी आपत्तियों को सार्वजनिक किया।
सोमवार को चार नाराज जजों से मिल सकते हैं सीजेआई
18 जनवरी के बाद
सीजेआई और 4 वरिष्ठ जजों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है क्योंकि जस्टिस चेलमेश्वर दिल्ली से बाहर थे। वह अपने चेन्नई व बंगलूरू के पूर्व निर्धारित दौरे पर थे। सूत्र के अनुसार, ऐसा मुमकिन है कि सोमवार को केसों की सुनवाई से पहले सीजेआई और 4 जज मुलाकात कर सकते हैं।