सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के लिए जारी अपने ‘संकल्प पत्र’ में भाजपा ने देश के व्यापारियों को मासिक पेंशन देने का वायदा किया था। चुनाव में प्रचंड बहुमत पाने के बाद केंद्र सरकार ने अपना वायदा निभाया और देश के सभी किसानों और व्यापारियों को पेंशन देने की योजना की घोषणा कर दी। लेकिन सरकार की यह लोकप्रिय योजना अब व्यापारियों में असंतोष का कारण बन रही है।
दिल्ली में ग्लास एंड अल्युमिनियम के थोक व्यापारी धर्मेन्द्र कहते हैं कि यह योजना व्यापारियों को छलने की कोशिश है। सरकार ने कहा है कि प्रीमियम भरने के बाद ही उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। लेकिन अगर प्रीमियम देकर ही पेंशन लेनी थी तो इसके लिए अभी से कई बीमा कम्पनियों के विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में सरकार की इस घोषणा का कोई विशेष महत्त्व नहीं है, सिवाय इसके कि यह योजना अन्य बीमा कंपनियों की सेवाओं से कुछ सस्ती होगी।
स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने अमर उजाला से कहा कि सरकार ने फसल बीमा के नाम पर किसानों के साथ भी ‘छल’ किया था। किसानों को फसलों के नुक्सान होने पर बीमा देने की बात की गई थी। किसानों से बिना पूछे भी उनके किसान क्रेडिट कार्ड से बीमे का प्रीमियम ले लिया गया था।
बीमा कंपनी ने किसानों से भारी रकम वसूल ली, जबकि उन्हें बहुत कम भुगतान किया गया। इस प्रकार यह सेवा शुरू तो किसानों के नाम पर की गई, लेकिन इससे किसानों से ज्यादा फायदा बीमा कम्पनी को हुआ। व्यापारियों को पेंशन का मामला भी ऐसा ही हो सकता है, हालांकि अभी इस योजना की जमीनी सच्चाई सामने आनी बाकी है।
व्यापारी संगठन कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह केंद्र सरकार की ऐतिहासिक योजना है। वे लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। अब जब सरकार ने इस योजना की शुरुआत कर दी है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। इससे लगभग तीन करोड़ व्यापारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के स्वरूप से कुछ परेशानियां अवश्य हैं। मौजूदा स्वरूप में बड़ी संख्या में व्यापारी इसका लाभ लेने से वंचित रह जायेंगे। लेकिन वे जल्दी ही पत्र लिखकर केंद्र सरकार को कुछ सुझाव अवश्य देंगे जिससे इस योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा व्यापारियों को दिया जा सके।