मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और कोलोराडो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर Covid-19 के मरीज को वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं हो पा रहा और उस दौरान उसे सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही है, तो इमरजेंसी में रीयूज या रीपरपज क्लॉट-बस्टिंग दवा उसके लिए कारगर साबित हो सकती है।
यह दवा व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली एक प्रोटीन है, जिसे टिशू प्लास्मीनोजेन एक्टीवेटर (TPA) कहा जाता है। यह दवा उन लोगों को दी जाती है जिन्हें डिजॉव्ल ब्लड क्लॉट (खून के थक्के जम जाना), हृदय गति रुकना या स्ट्रोक (आघात) का सामना करना पड़ रहा है।
चीन और इटली के सामने आते मामलों का अध्यन करने पर पता चला है कि Covid-19 रोगियों में रक्त के थक्के जमने के कारण सांस लेने में काफी परेशानी होने लगती है, जो बाद में मौत का भी कारण बन जाता है। चीन और इटली के शव परीक्षण रिपोर्ट को देखने के बाद शोधकर्ताओं ने बताया है कि Covid-19 के रोगी सूजन से जुड़े ऊतक क्षति से पीड़ित हैं।
पिछले शोधों से यह भी पता चला है कि श्वसन (Respiratory) विफलता के दौरान खून के थक्के अक्सर फेफड़ों में बनते हैं, और छोटे थक्के जिन्हें माइक्रोथ्रोम्बी कहते हैं वो भी फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में बनते हैं। ये छोटे-छोटे थक्के खून को फेफड़ों के वायु-मार्ग (Airspaces) तक पहुंचने से रोकते हैं।
कोरोनावायरस ने दुनिया के कई देशों में तबाही मचा दी है। इस महामारी की चपेट में अब तक 542,146 लोग आ चुके हैं। वहीं, 24,000 से ज्यादा लोगों की मौत कोरोनावायरस के चलते हुई है। हालांकि, इस दौरान 125,487 लोग इस वायरस से पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। भारत में कोरोनावायरस से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 724 लोगों में यह वायरस पाया गया है। गुरुवार को भारत में कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। गुरुवार को इस वायरस ने सात लोगों की जान ली है।