कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे महाराष्ट्र के ठाणे जिले के एक दंपती के लिए नेपाल में आई बाढ़ की खबर बेहद सदमे वाली थी। दंपती ने बताया कि कुछ दिन पहले जिन लोगों ने सीमा पर उनकी मदद की थी, उनके बाढ़ में मारे जाने की खबर पर यकीन करना मुश्किल था।
डोंबिवली निवासी प्रकाश माने और उनकी पत्नी प्रतिभा रविवार को सुरक्षित घर लौटे। कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बीच वे फंस गए थे। उनके साथ महाराष्ट्र के 43 भारतीय तीर्थयात्रियों का समूह था। डोंबिवली स्थित घर पहुंचने पर दोस्तों और परिवार के लोगों ने उनका भावुक स्वागत किया। प्रकाश माने ने अपने अनुभव के बारे में बताया कि यात्रा के दौरान घटनाक्रम किस तरह बदला।
कैलाश पवर्त पर मिलीं आपदा की खबर
उन्होंने कहा, हम तिमुरे सीमा चौकी (नेपाल-तिब्बत सीमा पर) पार कर चुके थे। सभी जरूरी आव्रजन प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद हम मानसरोवर झील की ओर बढ़े। जब हम कैलाश पर्वत के दर्शन कर रहे थे, तभी इलाके में प्राकृतिक आपदा की खबरें धीरे-धीरे आने लगीं।
माने ने कहा, शुरुआत में हमें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था। वापसी के दौरान जब हम सागा शहर पहुंचे और सोशल मीडिया, समाचार माध्यमों और दोस्तों से अपडेट मिलने लगे, तब हमें स्थिति की भयावहता का पता चला।
चीन के जिस बॉर्डर से निकले थे, वहां कुछ नहीं बचा
दंपती ने बताया कि नेपाल-चीन सीमा पर कई स्थानीय सेवा प्रदाताओं, सीमा सुरक्षा कर्मियों और आव्रजन अधिकारियों की मौत की खबर से उन्हें गहरा दुख हुआ। इन्हीं लोगों ने कुछ दिन पहले उनका स्वागत किया था, उन्हें खाना दिया था और यात्रा के दौरान मदद की थी।
प्रतिभा माने ने कहा, यह समझ पाना बेहद मुश्किल था कि जो लोग कुछ घंटे पहले हमारी सेवा कर रहे थे और हमारी यात्रा के लिए शुभकामनाएं दे रहे थे, वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ की भयावहता के बाद तीर्थयात्रियों में सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता बढ़ गई थी। भारत, नेपाल और अन्य देशों के तीर्थयात्रियों ने यात्रा के दौरान आपदा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रार्थना सभाएं भी कीं।
प्रकाश माने ने महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने खास तौर पर भारतीय दूतावास के अधिकारियों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की और तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए चीनी अधिकारियों के साथ समन्वय किया।
माने के मुताबिक, अधिकारी लगातार उनकी स्थिति, स्वास्थ्य और यात्रा से जुड़ी जरूरतों पर नजर रख रहे थे। समूह के सभी 43 भारतीय तीर्थयात्री सुरक्षित अपने-अपने घर पहुंच गए हैं। माने ने कहा कि पवित्र यात्रा पूरी होने की खुशी जरूर है, लेकिन इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों का दुख उनके साथ हमेशा रहेगा।
1,000 से अधिक लोगों की मौत
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के टूटने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी। इससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बे और गांव प्रभावित हुए। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बाढ़ का पानी आ गया। इससे घर, वाहन, सड़क और पुल बह गए और जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। मंगलवार को इस भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई। सुरक्षा बलों ने देश के आठ जिलों से और शव बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 583 विदेशी नागरिक और कई सुरक्षा कर्मी शामिल हैं।