कमलू का कहना है कि मैं केवल कल्पना कर सकता हूं कि मेरे परिवार के पांच सदस्यों के साथ क्या हुआ होगा, जिन्हें बचाया नहीं जा सका। मुझे हमेशा अपने पोते-पोतियों, बेटे-बहू और पत्नी की याद आती है। उनका चेहरा मेरे सामने घूमता है। लेकिन मैं असहाय हूं, क्या कर सकता हूं।
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी में 19 जुलाई को भीषण भूस्खलन हुआ था। हााहरदसे में कई लोगों की मौत हो गई। भूस्खलन में अपने दो पोते-पोतियों सहित परिवार के पांच सदस्यों को खोने वाले एक बुजुर्ग का कहना है कि जो मलबे में दब गया है, उसे वहीं आराम करने दिया जाए।
नौ में से चार सदस्यों की बची जान
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इरशालवाड़ी के रहने वाले कमलू पारधी (65) ने बताया कि वह होम स्टे का काम करते हैं। पहाड़ी पर आने वाले ट्रैकर्स और पर्यटकों को वह किराये से कमरा दिया करते थे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के नौ लोग भूस्खलन में फंस गए थे और वहीं दबे रह गए। स्थानीय लोगों के साथ मिलकर रेस्क्यू टीम ने चारों शवों को बाहर निकाला। कमलू की पत्नी, बेटा, बहू और दो पोते-पोतियां वहीं दबे रह गए। कमलू का कहना है कि शव अबतक सड़ चुके होंगे। इसलिए बेहतर है कि वे वहीं मलबे में पड़े रहें। वहीं आराम करें। मैं नहीं चाहता कि उनके शव को क्षत-विक्षत हालत में बाहर निकाला जाए और उन्हें कष्ट दिया जाए।
इसलिए शव को नहीं निकाला जा रहा है बाहर
कमलू का कहना है कि मैं केवल कल्पना कर सकता हूं कि मेरे परिवार के पांच सदस्यों के साथ क्या हुआ होगा, जिन्हें बचाया नहीं जा सका। मुझे हमेशा अपने पोते-पोतियों, बेटे-बहू और पत्नी की याद आती है। उनका चेहरा मेरे सामने घूमता है। लेकिन मैं असहाय हूं, क्या कर सकता हूं। मैंने उनके लिए ढेर सारे सपने देखे थे लेकिन अब क्या ही करूं। कमलू ने बताया कि उनका छोटा बेटा काशीनाथ स्नातक उत्तीर्ण था। वह ग्राम पंचायत सदस्य के रूप में काम करता था। कोविड-19 में मेरे बेटे ने गांव के लोगों की खूब मदद की थी। मुझे लग रहा था कि जैसे बचाव दल ने मेरे परिवार के चार सदस्यों की जान बचाई, वैसे ही वे सभी सदस्यों को बाहर निकाल लेंगे। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। मलबा 20 फीट ऊंचा था। कई लोगं के शव क्षत-विक्षत थे, जिस वजह से बचाव दल को शव बाहर निकाल देने के लिए मना कर दिया।
144 लोगों को मंदिर के पास ठहराया
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भूस्खलन की जानकारी देते हुए राज्य मंत्री उदय सामंत ने रविवार को बताया था कि हादसे में 57 लोग लापता हैं। वहीं, इरशालवाड़ी में रहने वाले 228 लोगों में से 144 लोगों को पास के एक मंदिर में भेज दिया गया था। हालांकि, बचाव दल ने रविवार तक 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। लेकिन शव के सड़ जाने की आशंका के कारण लोगों ने और लोगों के शवों को बाहर निकालने से मना कर दिया था, जिस वजह से आगे रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चलाया जा सका।