बता दें कि गत वर्ष 'लॉकडाउन' को लेकर केंद्र सरकार को विपक्षी दलों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक दलों के अलावा औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों, व्यापारियों और श्रमिक संगठनों ने भी 'लॉकडाउन' की औचक घोषणा एवं इसके तरीकों पर सवाल उठाए थे। केंद्र सरकार इस दफा बहुत संभल कर कदम रख रही है। अभी तक केंद्र सरकार ने कहीं पर लॉकडाउन नहीं लगाया है। जिन राज्यों में लॉकडाउन या दिन-रात्रि कर्फ्यू, जो भी लागू हुआ है, उसका निर्णय राज्य स्तर पर ही लिया गया है। मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि लॉकडाउन का इस्तेमाल केवल अंतिम विकल्प के तौर पर ही किया जाए। अलग-अलग राज्यों के युवाओं को साथ लेकर इस दिशा में कदम आगे बढ़ाया जा सकता है।
केंद्र सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि प्रधानमंत्री की इस घोषणा पर काम शुरू हो गया है। अगर कोरोना इसी तेजी से फैलता है और लॉकडाउन लगाने की नौबत आती है तो लोगों को घरों के बाहर निकलने से रोकने के लिए स्थानीय नागरिकों का सहयोग लिया जाएगा। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के प्रतिनिधियों को साथ लेकर मुहिम शुरू करेंगे। कोविड गाइडलाइन को आसान तरीके से समझाकर लोगों को घरों के अंदर ही रहने के लिए कहा जाएगा।
कौन व्यक्ति कब बाहर निकल सकता है, इसे लेकर आपसी सहमति से रणनीति तैयार होगी। जिस तरह आईएमए ने 'कोरोना संगत व्यवहार' पर बल दिया है, उसे लोगों के बीच रखेंगे। कौन व्यक्ति प्लाजमा दे सकता है, अगर किसी को खून की जरूरत है तो उसका इंतजाम कैसे होगा, ये सब बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फार्मूले में शामिल रहेंगी।
लॉकडाउन के मुद्दे पर सामुदायिक सहयोग और धामिक संगठनों से मदद ली जाएगी। अधिकारी के मुताबिक हमारे देश में 100-200 गज पर कोई धार्मिक स्थल मिल जाता है। इन संगठनों की सेवाएं ली जाएंगी। ये संगठन अपने-अपने क्षेत्र में सहमति वाला लॉकडाउन या कोरोना संगत व्यवहार लागू कर सकते हैं। इन संगठनों के आसपास कोई भी अस्पताल, चाहे वह निजी है या सरकारी, उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कोविड और नॉन कोविड अस्पतालों के मामले में केंद्र सरकार सख्त कदम उठा सकती है। कई जगहों पर देखने को मिला है कि निजी अस्पतालों में सारी सुविधाएं हैं, लेकिन वे कोविड के मरीज को अंदर ही नहीं घुसने देते। ग्रामीण इलाकों में पंचायतों की मदद से कर्फ्यू या कोरोना संगत व्यवहार लागू किया जाएगा।