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सख्ती से कानून का पालन हो तो 'टूलकिट' के गलत इस्तेमाल से बचा जा सकता है

Wed, 19 May 2021 03:27 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और साइबर कानून के विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं, अगर सख्ती से कानून का पालन हो तो 'टूलकिट' के गलत इस्तेमाल से बचा जा सकता है। अगर मामला साबित हो जाए तो तीन साल की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है...
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राहुल गांधी-जेपी नड्डा (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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किसान आंदोलन में जब लाल किले की घटना हुई तो उसके उपरांत बहुत से लोगों को 'टूलकिट' का मतलब समझ आया था। आईटी एक्सपर्ट या दूसरे क्षेत्रों के विशेषज्ञ भले ही पहले से सोशल मीडिया के इस हथियार से वाकिफ रहे हों, लेकिन सामान्य जनमानस को इसके बारे में ज्यादा मालूम नहीं था। अब वही 'टूलकिट' दोबारा चर्चा में है। इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा में दंगल शुरू हो गया है। सवाल यह भी है कि क्या राहुल गांधी व जेपी नड्डा की टोली को 'टूलकिट के मनमर्जी इस्तेमाल' से डर नहीं लगता। कैसे इस कोरोना काल में भी सियासत जारी रहती है। आखिर कैसे इस टूलकिट में 'मोदी स्ट्रेन' व 'गिद्धों की राजनीति' जैसे शब्दों का बारूद भर दिया जाता है।

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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और साइबर कानून के विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं, अगर सख्ती से कानून का पालन हो तो 'टूलकिट' के गलत इस्तेमाल से बचा जा सकता है। अगर मामला साबित हो जाए तो तीन साल की कैद और पांच लाख रुपये जुर्माना लगता है। ऐसे मामलों में वह व्यक्ति तो कानून तोड़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा ही, जिसने पहली बार कोई फर्जी या अपुष्ट संदेश आगे बढ़ाया है। वे लोग भी उतने ही जिम्मेदार हैं, जो बिना सोचे समझे उस संदेश को रफ्तार दे रहे हैं।

बता दें कि किसानों के समर्थन में टूलकिट दस्तावेज साझा करने पर दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह का केस दर्ज किया था। दिशा रवि सहित कई दूसरे एक्टिविस्ट ने किसानों के विरोध-प्रदर्शन को समर्थन देने वाले एक ऑनलाइन दस्तावेज (टूलकिट) को आगे बढ़ाया था। इस मामले में केंद्र सरकार और भाजपा ने गहरी नाराजगी जताई थी। दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि को 13 फरवरी की रात को बंगलूरू स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया था। विपक्ष और सिविल सोसायटी के सदस्यों ने दिशा रवि की गिरफ्तारी पर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। इसे 'अभिव्यक्ति की आजादी' पर शिकंजा कसने वाला कदम बताया गया।

दस दिन बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए दिशा रवि को रिहा कर दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि पुलिस ने 22 वर्षीय छात्रा के खिलाफ 'डरावने साक्ष्य और अधूरी स्केचिंग' पेश की है। केंद्र सरकार, अभी तक हलफनामा दाखिल नहीं कर सकी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या आपके ऊपर जुर्माना लगाया जाना चाहिए। आपको हलफनामा दाखिल करने के लिए मार्च में समय दिया गया था। ऐसे में इस मामले की क्या पवित्रता रह जाती है।

अब टूलकिट को लेकर कांग्रेस और भाजपा में घमासान मचा है। कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, बीएल संतोष, स्मृति ईरानी और संबित पात्रा के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली के तुगलक रोड थाने में शिकायत देकर केस दर्ज करने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने इतना भी कह दिया कि यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है तो वे कोर्ट का रुख करेंगे। भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोनाकाल में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है। संबित पात्रा ने कहा, संकट काल में विपक्षी दल की 'गिद्धों की राजनीति' उजागर हुई है। कोरोना के समय जब पूरा देश महामारी से लड़ रहा है तो कांग्रेस ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए भारत को पूरे विश्व में 'अपमानित और बदनाम' करने की कोशिश की है। उनका आरोप था कि कांग्रेस पार्टी 'कोरोना' को 'इंडियन स्ट्रेन' और उससे भी आगे बढ़कर 'मोदी स्ट्रेन' कह कर आगे बढ़ा रही है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। गांधी ने आरोप लगाया कि ध्यान भटकाना, झूठ फैलाना और तथ्य छिपाना इस सरकार की नीति है। उन्होंने ट्वीट में लिखा, 'वैक्सीन कम होती जा रही हैं और कोविड से होने वाली मौतें बढ़ती जा रही हैं। केंद्र सरकार की नीति 'ध्यान भटकाओ, झूठ फैलाओ व शोर मचाकर तथ्य छुपाने की है'। कोरोनाकाल में यही हो रहा है।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, 'जहर' उगलने में कांग्रेस को महारत हासिल है। उन्होंने ट्वीट में लिखा, जब देश कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहा है तो भारत, कांग्रेस के इस रवैये को भी देख रहा है। मैं कांग्रेस से आग्रह करूंगा कि वह टूलकिट मॉडल से आगे निकले और कुछ रचनात्मक करे। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने ट्वीट में लिखा, 'देश कोरोना के विरुद्ध जंग लड़ रहा है। मैं समझ सकती हूं कि विपक्ष सरकार पर हमला करना चाहेगा, लेकिन वह इस स्तर तक जाएगी और इसके लिए राजनीति अवसरवाद का व्यवसायीकरण और मौत का व्यापार करेगी, कभी सोचा नहीं था।
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सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और साइबर कानून के विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं, आजकल हर व्यक्ति या राजनीतिक दल को यह जल्दबाजी रहती है कि उसकी बात सबसे पहले लोगों तक पहुंच जाए। सोशल मीडिया पर बहुत से लोग इसी में लगे रहते हैं कि कोई जानकारी वे सबसे पहले अपलोड कर दें। यदि वह जानकारी गलत है तो ऐसे लोगों को कानून के उल्लंघन का सामना करना पड़ेगा।

मौजूदा आईटी एक्ट में उल्लंघनकर्ता पर तीन साल की कैद और पांच लाख रुपये का जुर्माना है। मानहानि का केस अलग से हो सकता है। आरोपी को हर्जाना भी देना पड़ सकता है। इससे बचने का सीधा उपाय यही है कि किसी बात को बिना सोचे समझे आगे न बढ़ाएं। खुद को सावधानी बरतनी होगी। लोगों को अपनी इंटरनेट से जुड़ी कई आदतों में बदलाव लाना होगा।

साइबर जानकारी को अपने जीवन का हिस्सा बनाना है। राजनेता, जिस तरह से टूलकिट के जरिए किसी गलत सूचना को आगे बढ़ाते हैं तो उनके खिलाफ फौजदारी का मामला दर्ज हो सकता है। इसमें अलग से हर्जाने का भी प्रावधान है। सोशल मीडिया पर कोई भी जानकारी या सूचना को आगे बढ़ाने से पहले उसकी तथ्यात्मक प्रमाणिकता जांचना बहुत जरूरी है।
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