देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना के संकट से निपटने के लिए सरकार नई रणनीति तैयार कर रही है। सरकार ने इंटेलिजेंट टेस्टिंग स्ट्रेटेजी को विकसित किया है ताकि भारत में कोरोना टेस्टिंग को बढ़ाया जा सके। कुछ राज्यों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं।
सरकार के सूत्रों के मुताबिक बड़े पैमाने बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दूसरे राज्यो से लौटे मजदूरों ने एक और चुनौती पेश की है। आईसीएमआर ने कहा कि हमने 2009 में फैले स्वाइन फ्लू से सबक लेते हुए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान निकाय ने कहा कि परीक्षण की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए, भारत ने वायरस से आगे बने रहने के लिए इंटेलिजेंट टेस्टिंग स्ट्रेटेजी विकसित की है।
उसने कहा कि देश में अभी 610 प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें से 432 सार्वजनिक और 178 निजी हैं, जो वर्तमान में प्रतिदिन 1.1 लाख नमूनों का परीक्षण कर रही हैं। परीक्षण क्षमता प्रति दिन 1.4 लाख नमूनों तक बढ़ा दी गई है, जिसे आगे बढ़ाकर दो लाख किया जा रहा है।
आईसीएमआर ने पहले ही अपने परीक्षण मानदंडों का विस्तार कर लिया है, ताकि लौटने वाले प्रवासियों और अन्य फ्रंट लाइन के कर्मचारियों को शामिल किया जा सके। आरटी-पीसीआर परीक्षण के अलावा जो राज्य टीबी उन्मूलन कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं, उन्हें कोरोना टेस्टिंग काम के लिए ट्रूनेट मशीन की तैनाती के लिए कहा गया है।
देश के किसी भी राज्य में जांच की बुनियादी सुविधाएं बेहतर नहीं हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अतिरिक्त प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। वर्तमान में 15 राज्यों में 367 मशीनें हैं और इसे 20 जून तक सभी राज्यों में 608 अतिरिक्त मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य है।