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'कागजों में बने शौचालय' और मिल गया सम्मान!

Sat, 05 Nov 2016 03:48 PM IST
आलोक प्रकाश पुतुल/ रायपुर
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Modi
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के मुंगेली और धमतरी जिले को भले ही 'खुले में शौच मुक्त' होने के लिये सम्मानित कर दिया लेकिन उनके इन दावों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इन दो जिलों के अलावा दूसरे जिलों के 15 विकासखण्डों को 'खुले में शौच मुक्त' यानी ओडीएफ जिला और विकासखण्ड घोषित किया और वहां के जिला पंचायत अध्यक्षों, जनपद पंचायत अध्यक्षों को सम्मानित किया।
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इन जिलों के अलग-अलग गांवों से आने वाली कहानियां बता रही हैं कि कागजों में दर्ज आंकड़े सच नहीं हैं। कई विकासखंड के गांवों में आज भी शौचालय नहीं बने हैं और तो और वहीं कुछ गांवों में इस सम्मान के बाद शौचालय बनाने का काम शुरु किया गया है। मुंगेली जिले के चिरौटी गांव को ही लें। पथरिया  विकासखंड के डिघोरा ग्राम पंचायत के इस गांव में कुल 45 घर हैं लेकिन गांव के अधिकांश घरों में शौचालय नहीं है।

स्त्री-पुरुष खुले में ही शौच के लिए जाते हैं। गांव के दौलतराम पात्रे के पास आधार कार्ड से लेकर सेल फोन तक सारी सुविधायें उपलब्ध हैं। वे राजनीति में भी सक्रिय हैं। लेकिन उनके घर में आज भी शौचालय नहीं है। दौलतराम ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "बचपन से खेत और जंगल से ऐसा रिश्ता रहा है कि कभी शौचालय की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। हमारे इलाके के सरपंच ने भी कभी शौचालय के लिये किसी तरह की मदद की बात नहीं कही।"
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'सरकारी सहायता मिले तो बनवाएंगे शौचालय'

Raman Singh
गांव की जानकी पात्रे का कहना है कि पूरा गांव खुले में जाता है, इसलिये कभी इस दिशा में नहीं सोचा। लेकिन जानकी का कहना है कि अगर सरकारी सहायता मिले तो वो घर में जरुर शौचालय बनवाने की पहल करेंगी। लेकिन मामला केवल चिरौटी या डिघोरा का नहीं है।

इलाके के कांग्रेसी नेता घनश्याम वर्मा का दावा है कि मुंगेली जिले में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे गांव हैं, जहां सभी लोगों के घर में शौचालय नहीं है। सरकारी आंकड़ों में भी यह बात स्वीकार की गई है। घनश्याम वर्मा कहते हैं-"कागज में बताने के लिये भले शौचालय बना दिया गया हो लेकिन हकीकत ऐसी नहीं है। कई जगह तो ऐसा शौचालय बना दिया गया है, जिसका उपयोग ही नहीं हो रहा है।" हालांकि सरकारी अफसरों के पास अपने आंकड़े हैं।

उनका दावा है कि जिले के सभी 674 गांवों में 97,776 शौचालय बनाये गये हैं और ये शौचालय पर्याप्त हैं। पथरिया इलाके के एसडीएम केएल सोरी मानते हैं कि कुछ गांवों में छोटी-मोटी परेशानियां हैं। सोरी कहते हैं, "छोटी-मोटी परेशानियां हैं। कहीं शौचालय बनाने के लिये लाया हुआ सामान चोरी चला गया तो कहीं बना हुआ शौचालय धसक गया। लेकिन यह सब तो होता ही रहता है। हम सभी चीजों को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं।" 
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कई इलाकों में बने आधे-अधूरे शौचालय

Toilet
वो पूरे सरकारी के साथ गुरुवार को सोरी चिरौटी गांव पहुंचे थे और पंचायत अफसरों के साथ मिल कर गांव में  शौचालय बनवा रहे थे।जाहिर है, मुंगेली जिले को भले 'खुले में शौच मुक्त' घोषित कर दिया गया हो लेकिन सोरी जैसे अफसरों को आने वाले दिनों में कई गांवों में अभी शौचालय बनवाने का काम करना है।

मुंगेली के किसान नेता आनंद मिश्रा का कहना है कि गांवों को पूरी तरह से 'खुले में शौच मुक्त' का असली दावा जिले के लोरमी और पथरिया विकासखंड के अंदरूनी इलाकों में देखा जाना चाहिये, जहां कई शौचालय कागजों में ही बना दिये गए।

आनंद मिश्रा कहते हैं, "कई इलाकों में दबाव बनाकर आधे-अधूरे शौचालय बना भी दिये गए। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती तो गांव के लोगों को इसके इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना है। इन शौचालयों के उपयोग न हो पाने के अलग-अलग कारण हैं। उनसे मुक्ति मिले बिना खुले में शौच से मुक्ति नहीं मिल सकती।" सीएमओ, छत्तीसगढ़ के मुताबिक, दो जिलों में 33 विकासखंडों के सात हजार चार सौ 59 गांवों में साल 2016-17 तक 13।24 हजार शौचालय निर्मित हैं।
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