एन. चंद्रबाबू नायडू।
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चंद्रबाबू नायडू की हिरासत वाली सीआईडी की याचिका पर सुनवाई स्थगित
आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा की एक अदालत ने कौशल विकास निगम घोटाला मामले में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू की हिरासत के अनुरोध संबंधी अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की याचिका पर सुनवाई 22 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। अतिरिक्त महाधिवक्ता पोन्नवोलु सुधाकर रेड्डी ने को बताया कि भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) की अदालत शुक्रवार को अपना फैसला सुना सकती है, क्योंकि दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को कौशल विकास निगम से धन के दुरुपयोग से संबंधित एक मामले में नौ सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। धन के दुरुपयोग के चलते राज्य सरकार के खजाने को 300 करोड़ रुपये से अधिक का कथित रूप से नुकसान हुआ था। चंद्रबाबू नायडू वर्तमान में राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल में बंद है।
बोइंग ने पी-8आई विमान के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' रुख पेश किया
अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने भारत में लंबी दूरी के समुद्री निगरानी एवं पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान पी-8आई की इंजीनियरिंग, विनिर्माण और रखरखाव क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अपनी योजना की रूपरेखा पेश की। बोइंग की नजर छह अतिरिक्त विमानों के ऑर्डर पर है। फिलहाल भारतीय नौसेना के पास 12 पी-8आई विमान हैं। भारत के अलावा, इस विमान का संचालन अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, दक्षिण कोरिया और जर्मनी द्वारा किया जा रहा है।
रेलवे के तीन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ चलेगा मुकदमा
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट को सूचित किया कि रेलवे के तीन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए गृह मंत्रालय की ओर से मंजूरी मिल चुकी है। विशेष सीबीआई न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने एजेंसी की दलील पर गौर करते हुए मामले में दाखिल आरोपपत्र पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की। इससे पूर्व सीबीआई ने पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू यादव के खिलाफ कथित नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में एक ताजा आरोपपत्र के संबंध में गृह मंत्रालय से मंजूरी हासिल की थी। मामले में सीबीआई ने पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव समेत बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोप है कि केंद्रीय रेल मंत्री रहने के दौरान लालू प्रसाद ने 2004 से 2009 के बीच जिन लोगों को नियमों में शिथिलता बरतते हुए डी ग्रुप की नौकरियां दी गई थी, उनसे इसकी एवज में जमीनें ली गई।