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मुंशी प्रेमचंद के रंग में रंगा गूगल का डूडल, आज कथा सम्राट का 136वां जन्मदिन

Sun, 31 Jul 2016 11:47 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : google
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दुनिया भर के साहित्य प्रेमियों के लिए कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद प्रेरणा हैं, और वे उनका आज 136वां जन्मदिन मना रहे हैं। दुनिया का टॉप सर्च इंजन गूगल भी आज मुंशी प्रेमचंद के रंग में रंगा है। गूगल ने प्रेमचंद के जन्मदिन के मौके पर डूडल बनाया है। गूगल का आज का डूडल मुंशी जी की तस्वीर के साथ-साथ ग्राणीण भारत की भी झलक पेश करता है। डूडल प्रेमचंद की हिंदी उपन्यास 'गोदान' की से प्रेरित है। गोदान प्रेमचंद की आखिरी उपन्यास मानी जाती है, जो कि 1936 में पहली दफा प्रकाशित हुई थी।
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प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 में उत्तर प्रदेश के लमही गांव में हुआ था। उन्होंने 13 वर्ष की उम्र में ही लेखन कार्य शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने पूरे जीवन में 300 के करीब कहानियां, उपन्यास और निबंध लिखे।

साल 1920 में भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल होने से पहले उन्होंने कई वर्षों तक शिक्षक पद पर रहते हुए नौकरी की। उन्होंने हिंदी को अपनी भाषा का माध्यम चुना, हालांकि वह उर्दू, फारसी और इंग्लिश में भी दक्ष थे। पिता की मौत के बाद प्रेमचंद पढ़ नहीं पाए।
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उन्होंने खुद के बारे में बहुत कम लिखा, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने आस-पास घटती चीजों और सामाजिक सरोकारों को अपने लेखन में खूब पिरोया है। वह आठ साल के थे जब उनकी मां गुजर गईं, और उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली।
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हमेशा जमीन से जुड़े एक आम इंसान रहे मुंशी प्रेमचंद

- फोटो : ht
प्रेमचंद की शादी 15 वर्ष की उम्र में हो गई थी, लेकिन उनकी पत्नी उम्र में उनसे बड़ी थीं। 1897 में उनके पिता के देहांत के बाद प्रेमचंद के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। कहा जाता है कि प्रेमचंद की पहली पत्नी उन्हें छोड़कर वापस अपने पिता के घर चली गई थीं। प्रेमचंद भी उन्हें वापस लाने नहीं गए और 1906 में एक विधवा बालिका बधु शिवारानी से शादी कर ली। 

इस शादी की वजह से उन्हें समाज का खासा विरोध झेलना पड़ा। दूसरी पत्नी से उनकी तीन संतानें हुईं, अमृत राय, श्रीपत राय और कमला देवी। 

प्रेमचंद हकीकत के बहुत करीब रहे और हमेशा जमीन से जुड़ीं कहानियां और उपन्यासें लिखीं। उनके लिखे साहित्य की उपयोगिता इसी से समझी जा सकती है कि स्कूलों के हिंदी पाठ्यक्रम में उनकी लिखी कहानियां आज भी समाहित हैं। यही नहीं, उनके लेखन को दुनिया भर की कई भाषाओं में अनुवादित किया गया।
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