कांग्रेस ने गुजरात में जीत पाने के लिए अपना नारा गढ़ दिया है। पार्टी ने राज्य में कांग्रेस आवे छै, नवसर्जन लावे छै.... का नारा दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भरत सिंह सोलंकी का कहना है कि इस नए नारे के बल पर कांग्रेस गुजरात में जबरदस्त जीत हासिल करेगी।
कांग्रेस आवे छै, नवसर्जन लावे छै... के बहाने कांग्रेस गुजरातियों को 1960 के दशक की याद दिला रही है। तब गुजरात महाराष्ट्र से अलग राज्य बना था। उस समय वहां कांग्रेस की सरकार थी। भरत सिंह सोलंकी कहते हैं कि 1960 के दशक से कांग्रेस की सरकार और मुख्यमंत्रियों ने राज्य में विकास की नींव रखनी शुरू की थी।
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विश्वविद्यालय, अस्पताल, डेरी, जीएफसी, रिफाइनरी, उद्योग सबकी ऐसी नींव रखी गई कि गुजरात समृद्ध राज्य में बदल गया। भरत सिंह सोलंकी और अशोक गहलोत दोनों का दावा है कि गुजरात भाजपा के हाथ से निकल रहा है। गहलोत का कहना है कि गुजरात में भाजपा की खराब दशा देखकर ही प्रधानमंत्री पिछले 35 दिन में पांच बार गुजरात का दौरा कर आए हैं।
चर्चा में राहुल गांधी के तंज
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के तंज न केवल सोशल मीडिया में बल्कि गुजरात में भी लोगों के बीच खूब धमाल मचा रहे हैं। राहुल गांधी ने ताजा निशाना वित्त मंत्री अरुण जेटली पर साधा है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने जेटली पर तंज कसते हुए कहा है कि डा. जेटली आप किसी से कम नहीं, आपकी दवा में दम नहीं। इससे पहले विकास पागल हो गया है.... का तंज भी खूब वायरल हुआ था।
जीएसटी की परिभाषा गब्बर सिंह टैक्स ने भी खूब धमाल मचाया था। भूख की बढ़ रही समस्या पर राहुल ने दुश्यंत कुमार को याद किया था। उन्होंने तंज कसा कि भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ। राहुल के इस तंज के जवाब में खुद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को उतरना पड़ा था।
राहुल का तंज जय शाह को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आया तो खूब वायरल हुआ। अपने इस तंज में राहुल ने कहा था शाहजादा के बारे में न बोलूंगा, न बोलने दूंगा। राहुल का यह तंज प्रधानमंत्री मोदी के न खाऊंगा, न खाने दूंगा के बयान पर सटीक वार था।
बस एक फैक्टर में कमजोर है कांग्रेस
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस बस एक मामले में फीकी पड़ रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में मुद्दे, माहौल, जनता तथा गुजरात का हर वर्ग पंजे को उत्साह दे रहा है। इससे कांग्रेस उपाध्यक्ष और उनकी टीम के उत्साह का सैलाब देखते बन रहा है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कांग्रेस के पास गुजरात में बड़ा चेहरा नहीं है।
गुजरात से आने वाले अहमद पटेल और मधुसूदन मिस्त्री के चेहरे पर पार्टी चुनाव लड़ने का जहां जोखिम नहीं उठा सकती, वहीं शक्ति सिंह गोहिल, भरत सिंह सोलंकी समेत अन्य का कद इस कदर बड़ा नहीं है। शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस छोड़कर जा चुके हैं।
इसके अलावा बड़ी चुनौती अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मनवाणी, हार्दिक पटेल के बीच संतुलन बिठाने की भी होगी। स्वास्थ्य कारणों से कांग्रेस अध्यक्ष जहां प्रचार में बड़ा योगदान नहीं कर सकेंगी, वहीं राहुल गांधी के सिवाय पार्टी के पास जनता के बीच में अपील करने वाला चेहरा नहीं है।