तीन बच्चा होने पर कठोर कानून
बिल के मसौदे में दो से अधिक बच्चा पैदा करने वाले जोड़ों के लिए कठोर कानून बनाने की बात कही गई है। मसौदे के अनुसार, अगर कोई दंपती सरकारी नौकरी में है और इसके बाद भी वह तीन बच्चा पैदा करता है तो उसकी सरकारी नौकरी खत्म कर दी जानी चाहिए। इसके अलावा ऐसे दंपती को वोट देने, राजनीतिक पार्टी बनाने या पंचायत से लोकसभा स्तर तक किसी भी प्रकार का चुनाव लड़ने, या इन संस्थाओं के लिए नामांकित किए जाने के अधिकार पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए।
तीन से अधिक बच्चा पैदा करने वालों को किसी भी प्रकार की सरकारी सब्सिडी न देने, सरकारी या प्राइवेट कंपनियों में ग्रेड-1 से ग्रेड-4 स्तर तक कोई नौकरी न दिए जाने का कठोर सुझाव दिया गया है। ऐसे लोगों को राजनीतिक दल के साथ-साथ किसी अन्य संगठन के बनाने या इनमें कोई पद धारण करने पर भी प्रतिबंध लगा दिए जाने की बात कही गई है।
क्या नागरिकता खत्म करने की बात है?
इस बिल का ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील अश्विनी उपाध्याय ने तैयार किया है। क्या इस बिल में तीन बच्चा पैदा करने पर नागरिकता अधिकार खत्म करने की बात कही गई है? अमर उजाला के इस सवाल पर अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि किसी भी नागरिक के दो तरह के अधिकार होते हैं- मूल अधिकार और कानूनी अधिकार। बिल में दो से अधिक बच्चा पैदा करने पर व्यक्ति के मूल अधिकार में कटौती की कोई बात नहीं कही गई है, लेकिन उसके पार्टी बनाने, चुनाव लड़ने या मतदान करने के कानूनी अधिकार को समाप्त करने की बात अवश्य कही गई है।
अश्विनी उपाध्याय द्वारा तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में प्रसिद्ध वकील सुब्रमण्यम स्वामी का सुझाव भी शामिल है। उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में इसे प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में लाने में भी प्रमुख भूमिका निभाई है। इस बिल को ड्राफ्ट करने के लिए अश्विनी उपाध्याय की प्रशंसा भी की है।
बिल पेश करने वाले भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने अमर उजाला से कहा कि देश में जनसंख्या अनियंत्रित गति से बढ़ रही है। इसके कारण गरीबी, भुखमरी, भ्रष्टाचार-अपराध और अन्य परेशानियां पैदा हो रही हैं। केंद्र सरकार लोगों के विकास के लिए जो भी प्रावधान करती है, भारी आबादी के कारण ये प्रावधान ऊंट के मुंह में जीरा के समान साबित होते हैं।
हरनाथ सिंह यादव ने कहा कि अगर जल्द ही कठोर जनसंख्या नीति नहीं लागू की गई तो आने वाले समय में सबको भोजन, पानी और आवास उपलब्ध कराना संभव नहीं रह जाएगा। इससे समाज में अपराध बढ़ेगा और देश की संप्रभुता और अखंडता को भी खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इसलिए आज आवश्यकता इस बात की है कि जल्द से जल्द कठोर जनसंख्या नीति लाकर आबादी को नियंत्रित किया जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार भी ला रही विशेष जनसंख्या नीति
इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार 11 जुलाई को अपनी जनसंख्या नीति का खुलासा कर सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नीति के प्रमुख बिंदुओं से परिचित करा दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार की जनसंख्या नीति में एक-दो बच्चा नीति को प्रोत्साहन देने के लिए कई उपयोगी सुझाव दिए गए हैं तो दो से अधिक बच्चा पैदा करने वालों को अलग-अलग तरीके से हतोत्साहित करने की बात कही गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश की जनसंख्या नीति में भी दो से अधिक बच्चा पैदा करने वालों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष के प्रारंभ में चुनाव होना भी तय है और प्रदेश में चुनावी राजनीति धीरे-धीरे गरमाने लगी है, अनुमान है कि उत्तर प्रदेश की जनसंख्या नीति और राज्यसभा में पेश किये गए जनसंख्या नियंत्रण बिल पर राजनीति तेज हो सकती है।