घाटी के हजारों युवा बनना चाहते हैं पुलिसवाले
घाटी में आजादी की मांग और आतंकियों के खौफ के बीच हजारों युवा पुलिसबल और भारतीय सेना में शामिल होने की इच्छा रखते हैं। अधिकारियों के अनुसार इस साल 5000 लोग जिसमें 218 महिलाएं शामिल है, उनकी कांस्टेबल पद पर भर्ती हुई। उन्होंने कहा 698 सब- इंस्पेक्टर की भर्ती आखिरी चरण में है। जिसके लिए पिछले साल मई में 67,000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इसमें से 35,722 उम्मीदवार कश्मीर से थे। इस महीने पुलवामा के लेथपुरा के कमांडो ट्रेनिंग सेंटर से 790 जवानों ने अपना प्रशिक्षण पूरा किया है। वहीं जम्मू के विजयपुर के पुलिस टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन से 215 कांस्टेबल ने प्रशिक्षण पूरा किया है। 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद जहां घाटी में काफी विरोध प्रदर्शन हो रहा था, उसी बीच केवल 6000 रुपए की मासिक आय वाली विशेष पुलिस बल के पद के लिए लगभग 25,000 युवा कश्मीरियों ने आवेदन किया था।
बुरहान वानी के बाद नायकू ने संभाली हिजबुक की कमान
30 साल का नायकू सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर 2016 में पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी की मौत के बाद आना शुरू हुआ था। उसके सिर पर 12 लाख रुपए का ईनाम है। अवंतीपुरा के दुरबग के नायकू मोहल्ले का निवासी नायकू घाटी के वांछनीय आतंकियों की A++ श्रेणी में आता है। उसने घाटी में पिछले साल सबजार भट की मौत के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के मुखिया का पद संभाला है। केंद्रीय सुरक्षा अधिकारी ने कहा, 'नायकू को पूरी घाटी में हिजबुल का कमांडर माना जाता है। पिछले एक साल के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने उसे कई बार घेरा है लेकिन हर बार वह किसी तरह बचकर भाग निकलने में सफल रहा।' अधिकारी ने आगे कहा कि नायकू ने दृढ़ता से अपनी एक उसूलपरस्त आतंकवादी की छवि बनाई है।