देश के घर-घर में विज्ञान की बयार चलाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इसके लिए विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग ने एक इंटरनेट आधारित साइंस चैनल ‘भारत विज्ञान’ शुरू किया है तो दूरदर्शन के साथ रोजाना एक घंटे का ‘डीडी विज्ञान’ कार्यक्रम प्रसारित करने की भी तैयारी है। मंगलवार को इसके लिए प्रसार भारती और विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
इन दोनों प्रमुख पहल के आगाज की घोषणा करते हुए मंगलवार को केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इंटरनेट आधारित भारत विज्ञान चैनल को किसी भी स्मार्ट फोन या इंटरनेट कनेक्शन वाले स्मार्ट टीवी व कंप्यूटर पर देखा जा सकेगा।
इसमें विज्ञान से जुड़े कार्यक्रमों के लाइव शेड्यूल प्ले और वीडियो ऑन डिमांड सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने बताया कि दूरदर्शन पर भी सोमवार से शनिवार तक रोजाना शाम 5 बजे से एक घंटे का डीडी विज्ञान कार्यक्रम दिखाया जाएगा, जिसमें साइंस फिक्शन, लघु वृतचित्र, अविष्कार और उपलब्धियों से जुड़े शो दिखाए जाएंगे।
विज्ञान प्रसार और दूरदर्शन के बीच एमओयू हस्ताक्षर में सचिव डीएसटी आशुतोष शर्मा, सचिव सूचना और प्रसारण अमित खरे, महानिदेशक दूरदर्शन सुप्रिया साहू, सीईओ प्रसार भारती ने भाग लिया। इस मौके पर शशि शेखर वेम्पति, निदेशक विज्ञान प्रसार, डॉ नकुल पाराशर आदि मौजूद रहे।
2030 तक विज्ञान जगत के शीर्ष-3 देशों में आने का लक्ष्य
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वर्ष 2030 तक हमें विज्ञान व प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शीर्ष-3 देशों में शामिल होना है। देश की 92 फीसदी आबादी तक पहुंच रखने वाला दूरदर्शन विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है। उन्होंन जल्द ही देश में एक चौबीस घंटे-सातों दिन चलने वाला डीडी साइंस चैनल शुरू होने की भी उम्मीद जताई।