224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 104, कांग्रेस के 79, जद(एस) के 37, बसपा(01), केपीजेपी(01) और एक निर्दल विधायक हैं। सरकार के सत्ता में बने रहने के लिए उसे 113 विधायकों का समर्थन चाहिए। लेकिन यदि कांग्रेस और जद(एस) के करीब 13 विधायक इस्तीफा दे देते हैं, तब सदन 111 विधायकों का हो जाएगा।
ऐसी स्थिति में सरकार बनाने या मौजूदा सरकार को बने रहने के लिए विधानसभा में 106 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा। इस तरह से भाजपा राज्य में आसानी से सरकार बनाने का दावा पेश कर सकेगी। उसे तब बसपा के एक विधायक के समर्थन या उसे अपने पाले में करने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।
क्या कहते हैं भाजपा के प्रवक्ता
भाजपा के तेज तर्रार प्रवक्ता नलिन कोहली को क्या हो रहा है, उसका पता नहीं है। वह केवल इतना कह रहे हैं कि जनादेश के मामले में तीसरे नंबर पर रही पार्टी का राज्य में मुख्यमंत्री है। दूसरे नंबर पर रही पार्टी ने इसे जनता का जनादेश बताकर तीसरे नंबर की पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई है। इस सरकार के मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि वह सीएम जरूर हैं, लेकिन उनकी हालत क्लर्क जैसी हो गई है।
कोहली कहते हैं कि सोचिए जरा, जब सीएम ऐसा कह रहे हैं तो सरकार के साथ रहने वाले एमएलए और जनता पर क्या गुजर रही होगी। अब यदि इस स्थिति में सरकार के साथ के लोग उनका साथ छोड़कर भाग रहे हैं तो इसमें भाजपा क्या कर सकती है। नलिन कोहली का कहना है कि इसका खतरा हमारे विधायकों पर भी हो सकता है। इसलिए हमारे विधायक दिल्ली के पास एनसीआर में हैं। कोहली का कहना है कि इसके अलावा वह कुछ और नहीं कह सकते।
अपने कर्मों से गिर जाए सरकार तो अच्छा है
भाजपा के नेताओं के अनुसार अपने कर्मों से कर्नाटक की राज्य सरकार गिर जाए तो अच्छा है। यह पूछने पर क्या कोई आपरेशन लोटस चल रहा है, तो भाजपा के नेता खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं। उनका कहना है कि एमपी में प्रचारित किया जा रहा है कि भाजपा हार गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास का मॉडल फेल हो गया। जबकि वहां भी पिछले महीने सरकार को समर्थन देने वाले विधायक लगातार साथ छोडऩे की धमकी दे रहे हैं।
यह पूछने पर कि क्या वहां भी आपरेशन लोटस(कमल) चल रहा है? नाम न छापने की शर्त पर सूत्र ने कहा कि कहीं भी सरकार गिर जाए तो प्रचारित किया जाता है कि भाजपा गिरा रही है। इस बारे में भाजपा के महासचिव कैलाश विजय वर्गीज और गोपाल भार्गव की टिप्पणी याद दिलाने पर सूत्र का कहना है कि इसका जवाब वही दे सकते हैं।
राजनीति में जोड़-तोड़ चलता है। तोड़-जोड़ भी चलता है। दल बदल कानून लागू होने के बाद तोड़-फोड़ और जोड़ चलने लगा है। भाजपा भी इसमें यकीन रखती है। 2013 में उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार पर यह प्रयोग असफल हो गया था। लेकिन गोवा में इसी तरीके से भाजपा को सत्ता हासिल करने में सफलता मिली।
पार्टी ने इसी तरह का प्रयोग बिहार में भी किया और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से राजद, कांग्रेस बाहर हो गई। दोनों की जगह भाजपा ने ले लिया। मणिपुर में भी इसी तरीके से सत्ता का रास्ता तय हुआ। अरुणाचल में भी भाजपा ने यही प्रयोग अपनाया।
क्या कर्नाटक में भाजपा को फायदा मिलेगा?
इसको लेकर राजनीतिक जानकारों की दो राय है। पहली राय यह है कि यदि कर्नाटक की सरकार गिरी तो पूरे देश में भाजपा की छवि खराब होगी। इसकी सहानुभूति कांग्रेस को कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों में मिलेगी। कर्नाटक में इस घाव से जख्मी कांग्रेस और जद(एस) मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इससे लोकसभा की चुनाव की तस्वीर बदल जाएगी।
दूसरा तर्क है कि भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा अच्छे प्रशासक हैं। अभी लोकसभा चुनाव होने में दो महीने से अधिक का समय है। तब तक वह कर्नाटक में जनता के सामने सरकार की अच्छी छवि बना लेंगे। इसका फायदा भाजपा को मिलेगा।
क्या सरकार गिराने की हड़बड़ी में हैं बीएस येदियुरप्पा?
कर्नाटक से लेकर राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेस के नेता बीएस येदियुरप्पा पर सरकार गिराने का आरोप लगा रहे हैं। क्या सच में येदियुरप्पा को लोकसभा चुनाव 2019 से पहले कर्नाटक राज्य सरकार गिराने की हड़बड़ी है। इस बारे में जानकारों का कहना है कि जिस दिन एचडी कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उस दिन से इस तरह का अंदेशा था। कर्नाटक भाजपा के नेता रह-रहकर इस तरह का बयान दे भी रहे थे।
बताते हैं कि येदिरप्पा को यह समय सही लग रहा है। क्योंकि दो महीने बाद लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होनी है। येदियुरप्पा को लग रहा है कि यदि अभी नहीं तो कभी नहीं, क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद यदि भाजपा केन्द्र में न लौटी तो सब कुछ धरा का धरा रह जाएगा।