सरकार द्वारा स्वदेशीकरण को बढ़ावा दिए जाने की योजना के तहत भारतीय वायु सेना ने रूस से 48 अतिरिक्त एमआई-17 वी5 (Mi-17 V5) मध्यम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर खरीदने की अपनी योजना को स्थगित कर दिया है। भारत ने लगभग 10 साल पहले रूस के साथ 80 एमआई-17वी5 (Mi-17V5s) की खरीद के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिन्हें सेना में धीरे-धीरे शामिल किया गया था। इन 48 विमानों को वायु सेना और अन्य विमानन एजेंसियों में शामिल करने की योजना थी जो अब इसे नहीं चाहते हैं।
सियाचिन और पूर्वी लद्दाख में होता है इस्तेमाल
भारत एमआई-17वी5 और एमआई-17 हेलीकॉप्टर बेड़े के सबसे बड़े ऑपरेटरों में से एक है और यहां तक कि देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित वीवीआईपी उड़ान के लिए इनका उपयोग करता है। एमआई-17वी5 सेना का सबसे बड़ा हथियार है और इसका उपयोग सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले और दूर-दराज के क्षेत्रों के साथ-साथ सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख में दैनिक आधार पर भारत की स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए किया जाता है।
भारतीय वायुसेना मेक इन इंडिया इन डिफेंस प्रोग्राम के तहत बड़े पैमाने पर स्वदेशी कार्यक्रमों का समर्थन कर रही है और एएलएच ध्रुव और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर सहित स्वदेशी मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों को प्राप्त करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।