चीन के साथ लगभग ढाई महीने तक चले डोकलाम विवाद और लद्दाख में घूसपैठ के बाद भारत अब कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहता है। इस प्रकार की कोई घटना भविष्य में न हो इसके लिए भारत अपनी सीमा मजबूत करने में लगा हुआ है। भारत अगले दो सालों में चीन से लगी सीमा पर रोड निर्माण का कार्य शुरू कर देगा, इन सभी प्रोजेक्ट्स को 2020-21 तक में पूरा कर लिया जाएगा।
61 सड़कों का निर्माण कार्य बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के अंतर्गत किया जा रहा है। इसमें से दो या तीन प्रोजेक्ट्स को छोड़कर सभी को लगभग 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा। भारत-चीन रोड निर्माण में बीते कुछ सालों में तेजी देखी गई है।
दूर दराज के इलाकों में सड़क निर्माण कार्य साल में महज 4-6 महीने ही हो पाता है, इस हिसाब से बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन की कार्यक्षमता में सुधार जमीनी स्तर पर नजर आ रहा है। आंकड़ों की बात करें तो 2014-15 में जहां 107 किमी रोड का निर्माण हुआ था, जबकि 2016-17 में 147 किमी सड़क बनी है।
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इसी तरह से पठारी इलाकों में 2016-17 में 174 किमी के मुकाबले 233 किमी रोड का निर्माण हुआ है। सूत्र के मुताबिक बीआरओ के अधिकारी प्रशासनिक और तकनीकी रूप से 100 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट को खुद ही मंजूरी दे सकते हैं। इस अधिकारक्षेत्र का सकारात्म प्रभाव रोड निर्माण के कार्य पर पड़ा है। जिससे निर्माण की लागत और समय दोनों में कमी आई है।
सुलझ गया डोकलाम विवाद
बता दें कि भारत और चीन के बीच करीब ढाई महीने से तनाव का कारण बना डोकलाम विवाद आखिरकार सुलझ चुका है। जबरदस्त कूटनीतिक तनातनी के बाद दोनों देश सिक्किम सेक्टर के विवादित डोकलाम क्षेत्र से अपनी-अपनी सेनाओं को एक साथ हटाने का फैसला किया था।
चीन पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
यह सहमति ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन जाने वाले थे। इसे चीन पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल भारत जहां लगातार विवादित क्षेत्र से सेना हटाने के बाद कूटनीतिक बातचीत के जरिए विवाद का हल निकालने पर जोर दे रहा था, वहीं चीन की ओर से भारत को लगातार युद्ध की धमकियां मिल रही थी।
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हालांकि चीन ने डोकलाम विवाद का हल निकलने की आधिकारिक पुष्टि तो की, लेकिन भारत के दावों के उलट कहा कि चीन नहीं बल्कि भारत विवादित क्षेत्र से अपनी सेना हटा रहा है। चीन ने विवादित क्षेत्र में पेट्रोलिंग जारी रखने की भी घोषणा की।