तमिल इतिहास के गौरवशाली शासक 'पेरुम पिडुगु' मुथरायर के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी करने की मांग राज्य सरकार की तरफ से केंद्र से की गई है। मामले में तमिलनाडु के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री एस. वी. मेय्यानाथन ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र भी लिखा है।
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि तमिल इतिहास के गौरवशाली शासक 'पेरुम पिडुगु' मुथरायर के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाए। राज्य सरकार का मानना है कि इससे तमिल शासन, संस्कृति और राजनीति की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी। तमिलनाडु के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री एस. वी. मेय्यानाथन ने यह आग्रह केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को लिखे पत्र में किया। उन्होंने कहा कि डाक टिकट जारी होने से न सिर्फ इस महान राजा की उपलब्धियां सामने आएंगी, बल्कि तमिलनाडु और देश के बाकी हिस्सों के बीच भावनात्मक एकता भी मजबूत होगी।
कौन थे 'पेरुम पिडुगु' मुथरायर?
मेय्यानाथन ने बताया कि मुथरायर वंश के इस महान वीर को न्यायप्रिय शासक, दक्ष प्रशासक, योद्धा और कला-कृषि के संरक्षक के रूप में जाना जाता है। 8वीं शताब्दी में उन्होंने तिरुचिरापल्ली क्षेत्र पर शासन किया। सेंथलाई, नार्थमलै और कावेरी के उत्तरी तट के पास मिलने वाले अनेक अभिलेख उनके शासन की गवाही देते हैं।
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कृषि और सिंचाई में बड़ा योगदान
पत्र में यह भी उल्लेख है कि मुथरायर की तरफ से शुरू की गई सिंचाई परियोजनाओं ने पूरे क्षेत्र को उपजाऊ 'अन्न भंडार" में बदल दिया था। उनके नाम के साथ जुड़ा उपनाम 'पेरुम पिडुगु' जिसका अर्थ है 'महान गर्जन', दर्शाता है कि उस समय लोग उन्हें कितने सम्मान से देखते थे।
लोकगीतों और उत्सवों में आज भी जीवित यादें
तिरुचिरापल्ली, पुदुकोट्टई और तंजावुर जिलों में आज भी कई लोकगीत, परंपराएँ और मंदिर-उत्सव मुथरायर की स्मृति को जीवित रखते हैं।
डिजाइन और दस्तावेज उपलब्ध कराने को तमिलनाडु तैयार
राज्य सरकार ने कहा है कि वह अभिलेखीय दस्तावेज, विशेषज्ञ सुझाव और डिजाइन सामग्री समेत हर तरह का सहयोग देने को तैयार है। सरकार को उम्मीद है कि केंद्र इस मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा और जल्द ही डाक टिकट जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।