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TN Assembly Session: तमिलनाडु सरकार दो भाषा प्रणाली का पालन जारी रखेगी, पहले संबोधन में बोले राज्यपाल अर्लेकर

Thu, 18 Jun 2026 10:22 AM IST
Asmita Tripathi पीटीआई, चेन्नई

सार

 टीवीके के सरकार बनने के बाद तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र आज से शुरू हो गया है। इस दौरान राज्यपाल ने कई बातें कही। उन्होंने कहा कि राज्य दो भाषा प्रणाली का पालन जारी रखेगी। 
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तमिलनाडु विधानसभा सत्र - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तमिलनाडु विधानसभा सत्र आज से शुरू हुआ। यह टीवीके सरकार के तहत तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र है। विधानसभा सत्र तमिल और राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ। वहीं, राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने अपना संबोधन शुरू किया है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अपने अभिभाषण की शुरुआत में ऐतिहासिक सियासी बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत अन्ना और पेरियार ईवीआर जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों का उल्लेख की। 

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राज्यपाल विश्वनाथ अर्लेकर ने गुरुवार कहा कि सरकार तमिल और अंग्रेजी में शिक्षण की मौजूदा दो-भाषा नीति का पालन करना जारी रखेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रति राज्य सरकार के विरोध को दोहराया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार का मानना है कि केंद्रीय निधि को तीन-भाषा फार्मूले के कार्यान्वयन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। 

राज्यपाल ने अपने संबोधन में क्या कहा?
राज्यपाल आर्लेकर ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में पहले कभी न देखा गया परिवर्तन आया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को राज्य की लंबे समय से लंबित मांगों पर एक ज्ञापन सौंपा है। इन मांगों में मेकेदातु बांध और मछुआरों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। राज्यपाल ने घोषणा की कि विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
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वित्तीय हस्तांतरण में पर जारी होगी रिपोर्ट
यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिए गए करों से तमिलनाडु के वित्तीय हस्तांतरण में उचित हिस्से की मांग करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि उचित वित्तीय हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कानूनी समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति इस मुद्दे को उच्चतम न्यायालय तक ले जाएगी। राज्यपाल आर्लेकर ने विधानसभा में कहा कि केंद्र के वित्तीय हस्तांतरण में 'भेदभावपूर्ण रवैये' पर रिपोर्ट प्रकाशित होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि तमिलनाडु को केंद्र से उचित वित्तीय हिस्सा मिलेगा।

पांच साल में कर्ज बढ़ा
सरकार राज्य के कल्याण और अधिकारों के लिए केंद्र पर दबाव डालेगी। राज्यपाल ने बताया कि तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से खराब हुई है। पिछली सरकार के 'राजकोषीय कुप्रबंधन' का सच उजागर करने के लिए श्वेत पत्र जारी किया गया। पिछले पांच वर्षों में राज्य का कर्ज लगभग दोगुना होकर 10 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह जीएसडीपी का 28.3 फीसदी है। प्रत्येक नागरिक पर 1 लाख रुपये से अधिक का कर्ज बोझ है। राज्यपाल ने डीएमके शासन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कर राजस्व 5.93 फीसदी से घटकर 5.40 फीसदी हो गया है।

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