सदस्यों की संख्या तेजी से घटने और दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की संभावित कार्रवाई की चिंता बढ़ने के बाद, बचे हुए बागी विधायकों ने आखिरकार आधिकारिक अन्नाद्रमुक गुट में फिर से शामिल होने का फैसला किया।
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ईपीएस की पकड़ हुई मजबूत
सुलह वार्ता के बाद असंतुष्ट विधायकों ने औपचारिक रूप से ईपीएस को समर्थन दिया और उन्हें अन्नाद्रमुक विधायक दल का नेता चुन लिया। इस फैसले की जानकारी देने वाला पत्र बाद में विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर को सौंप दिया गया। इसके बावजूद वरिष्ठ नेता शणमुगम अब भी अकेले प्रमुख असंतुष्ट नेता बने हुए हैं, जिन्होंने न तो ईपीएस गुट में वापसी की है और न ही अन्नाद्रमुक छोड़कर सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हुए हैं।