फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़: अन्नाद्रमुक में बगावत का अंत, पलानीस्वामी गुट में लौटे असंतुष्ट विधायक

Wed, 27 May 2026 08:01 PM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, चेन्नई।

सार

अन्नाद्रमुक में बगावत का दौर खत्म हो गया है, क्योंकि असंतुष्ट विधायक वापस ईके पलानीस्वामी  के नेतृत्व वाले गुट में लौट आए और उन्हें विधानसभा में पार्टी नेता चुनने का रास्ता साफ हो गया। इस पूरे घटनाक्रम से पार्टी में चल रही अंदरूनी खींचतान थम गई है। पढ़िए रिपोर्ट-
विज्ञापन
ईके पलानीस्वामी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/ एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के भीतर बगावत का दौर बुधवार को खत्म हो गया, जब असंतुष्ट विधायक पार्टी के आधिकारिक गुट में वापस लौट आए, जिसका नेतृत्व महासचिव ईके पलानीस्वामी कर रहे हैं। इसके बाद उनके तमिलनाडु विधानसभा में पार्टी के नेता के रूप में सर्वसम्मति से चुने जाने का रास्ता साफ हो गया।
विज्ञापन


इस घटनाक्रम से अन्नाद्रमुक नेतृत्व को अस्थायी राहत मिली है। विधानसभा विश्वास मत के बाद पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच चल रहे आंतरिक सत्ता संघर्ष के कारण कई दिनों से राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई थी।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह संकट तब शुरू हुआ, जब वरिष्ठ नेता सीवी षणमुगम के नेतृत्व में 25 बागी विधायकों के एक समूह ने अन्नाद्रमुक विधायक दल के नेता पद पर दावा किया और विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर को पत्र सौंपकर पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि को सदन का नेता चुने जाने की घोषणा की।
विज्ञापन


साथ ही, ईपीएस के प्रति वफादार 22 सदस्यों वाले गुट ने भी विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क कर विधायक दल के भीतर बहुमत समर्थन का दावा किया। इन समानांतर दावों ने नेतृत्व की पार्टी के भीतर संघर्ष को और तेज किया और अन्नाद्रमुक के औपचारिक विभाजन की संभावना बढ़ा दी थी।

बगावत क्यों कमजोर पड़ी?
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज थी कि बागी गुट मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) गठबंधन सरकार को समर्थन दे सकता है। हालांकि, बागी गुट को राजनीतिक रूप से जगह पाने की कोशिशें कीं। कोशिशें असफल होने के बाद यह बगावत धीरे-धीरे कमजोर पड़ गई।

बागी खेमे के चार विधायकों ने बाद में राज्य विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) में शामिल हो गए, जबकि छह अन्य विधायक ईपीएस गुट में वापस लौट आए, जिससे बागियों की ताकत काफी कमजोर हो गई।

सदस्यों की संख्या तेजी से घटने और दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की संभावित कार्रवाई की चिंता बढ़ने के बाद, बचे हुए बागी विधायकों ने आखिरकार आधिकारिक अन्नाद्रमुक गुट में फिर से शामिल होने का फैसला किया। 

ये भी पढ़ें: AMCA Project: भारत कर रहा पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी, जानें रेस में कौन सी कंपनियां

ईपीएस की पकड़ हुई मजबूत
सुलह वार्ता के बाद असंतुष्ट विधायकों ने औपचारिक रूप से ईपीएस को समर्थन दिया और उन्हें अन्नाद्रमुक विधायक दल का नेता चुन लिया। इस फैसले की जानकारी देने वाला पत्र बाद में विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर को सौंप दिया गया। इसके बावजूद वरिष्ठ नेता शणमुगम अब भी अकेले प्रमुख असंतुष्ट नेता बने हुए हैं, जिन्होंने न तो ईपीएस गुट में वापसी की है और न ही अन्नाद्रमुक छोड़कर सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हुए हैं।

विज्ञापन


इस ताजा घटनाक्रम को ऐसे समय में ईपीएस के अन्नाद्रमुक पर नियंत्रण को और मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है, जब पार्टी चुनावी हार और आंतरिक विभाजन के बाद खुद को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें