पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान की एक अदालत ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की नेता काकली गुप्ता को तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। यह मामला पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी से जुड़ा था। गुप्ता बर्धमान विकास प्राधिकरण (बीडीए) की अध्यक्ष भी हैं।
कोर्ट ने गुप्ता सहित 13 दोषियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 326 (खतरनाक हथियार से गंभीर चोट पहुंचाना) और धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, बाकी 12 दोषियों (सभी टीएमसी के नेता और स्थानीय पंचायत निकायों के पदाधिकारी) को 10 साल की सजा सुनाई गई।
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सभी दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अगर वे जुर्माना नहीं भरते हैं, तो उन्हें अतरिक्त एक साल की सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा, अदालत ने धारा 341 (गलत तरीके से रास्ता रोकना) और 34 (सामान्य इरादे से किया गया आपराधिक कृत्य) के तहत सभी दोषियों को एक महीने की सजा 500 रुपये का जुर्माना लगाया, जो साथ-साथ चलेगा।
बर्धमान में द्वितीय फास्ट कोर्ट के जज अरविंद मिश्रा ने सोमवार को तेरह आरोपियो को दोषी करार दिया, जबकि दो अन्य को मामले में बरी कर किया। कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, घटना पांच सितंबर 2017 की है। उस दिन रात करीब साढ़े आठ बजे रयान पंचायत सदस्य जीवन पाल के पिता देबू लाल पर नारीग्राम के दासपाड़ा में उनके घर के पास कई बदमाशों ने धारदार हथियार, लाठी और डंडों से हमला किया था। इस हमलें में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी दाहिनी आंख की रोशनी चली गई थी। हमले के बाद पीड़ित की पत्नी संध्या पाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
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कोर्ट ने पुलिस की लापरवाहई पर भी कड़ी टिप्पणी की। जज ने कहा कि सुनवाई के दौरान पीड़ित की चोट की रिपोर्ट केस डायरी से गायब हो गई थी और उन्हें खुद अस्पताल से इसे मंगवाना पड़ा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आरोपपत्र दाखिल करने से पहले क्या पुलिस ने वास्तव में यह रिपोर्ट जुटाई थी। इसके अलावा, कोर्ट ने इस मामले में जब्त किए गए खून से सने कपड़े, मिट्टी और हथियारों को कोर्ट में पेश न किए जाने पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूर्व बर्धमान के पुलिस अधीक्षख को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सजा में अंतर क्यों?
काकली गुप्ता को अन्य 12 दोषियों की तुलना में कम सजा दी गई है। कोर्ट ने कहा कि गुप्ता गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, इसलिए उनकी सजा को कम रखा गया। अन्य दोषियों में बर्धवान-1 पंचायत समिति के पदाधिकारी मानस भट्टाचार्य, रयान-1 पंचायत के प्रधान कार्तिक बाग और तृणमूल कांग्रेस के रयान-1 क्षेत्र के अध्य़क्ष शेख जमान शामिल हैं। वहीं, काकली गुप्ता के वकील विश्वजीत दास ने कहा कि वे इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
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