भारतीय जनता पार्टी ने नॉर्थ-ईस्ट के एक और राज्य में भगवा फहराया है। बीजेपी ने बिना चुनाव के ही त्रिपुरा राज्य में मुख्य विपक्षी दल होने का तमगा पा लिया है। यहां टीएमसी से निकाले गए सभी 6 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए और इस तरह से बीजेपी के पास जो एक भी विधायक नहीं थे, वो अब त्रिपुरा की मुख्य विपक्षी पार्टी हो गई है। तीसरी और आखिरी पार्टी के तौर पर कांग्रेस के पास 4 विधायक हैं।
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टीएमसी ने इन 6 विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते सस्पेंड कर दिया था। इनके नाम सुदीप रॉय बर्मन, आशीष कुमार साहा, दीबा चंद्र ह्रंगखावस, बिस्व बंधु सेन, प्रांजित सिंह रॉय और दिलीप सरकार है।
TMC MLAs from Tripura Sudip Roy Barman, Ashish Kr Saha, Diba Chandra Hrangkhawl, Biswa Bandhu Sen, Pranjit Singh Roy & Dilip Sarkar join BJP
— ANI (@ANI_news) August 7, 2017
आपको जानकार आश्चर्य होगा कि साल 2013 में त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव हुए थे। यहां वामदलों ने 60 में से 50 सीटें जीटकर क्लीन स्वीप किया था। और कांग्रेस को 10 सीटें मिली थी, जबकि टीएमसी का खाता भी नहीं खुला था। पर साल 2016 के पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वामदलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा, जिसके खिलाफ इन 6 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी और टीएमसी का दामन थाम लिया था। पर टीएमसी ने इन सभी विधायकों को हाल ही में पार्टी से निकाल दिया था और ये सभी बीजेपी में आ गए। मौजूदा समय में वामदलों के पास 50 विधायक, कांग्रेस के पास 4 विधायक और अब बीजेपी के पास 6 विधायक हो गए हैं। इस तरह से बीजेपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।
गौरतलब है कि एक निश्चित संख्या से अधिक विधायकों का पार्टी छोड़ना दलबदल कानून के तहत नहीं आता। अगर एक या दो विधायकों ने ऐसा किया होता तो उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली जाती। पर कांग्रेस में रहते हुए उसके 60% यानि 6 विधायकों ने विद्रोह किया था। इस तरह वो दलबदल कानून से बाहर रहे और टीएमसी से होते हुए बीजेपी में आ मिले।