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TMC Crisis: तृणमूल सांसदों ने दिल्ली में ओम बिरला को सौंपी अर्जी, अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

Sun, 14 Jun 2026 06:31 PM IST
Pavan एएनआई, कोलकाता

सार

तृणमूल कांग्रेस में गहराए संकट के बीच पार्टी के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अर्जी सौंपी है। इसके बाद कीर्ति आजाद ने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि स्पीकर नियमों के मुताबिक ही काम करेंगे, जैसा कि उन्होंने अब तक किया है। वहीं, अभिषेक बनर्जी ने उन्हें पत्र लिखकर बागी गुटों की अर्जी मानने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का मौका देने की अपील की है।
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कीर्ति आजाद, सांसद, टीएमसी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर पहुंचे। इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके पास लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात को कोई अप्वाइंटमेंट है, तो कीर्ति आजाद ने कहा, 'अगर अध्यक्ष हमें समय देंगे, तो हम जाएंगे। अन्यथा, अर्जी देने के बाद चले जाएंगे'।
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हमने स्पीकर को अर्जी सौंप दी- कीर्ति आजाद
वहीं, लोकसभा अध्यक्ष के आवास से बाहर निकलने के बाद टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, 'यह बिल्कुल साफ है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने कहा है और 10वीं अनुसूची के आर्टिकल 4 में भी इसका जिक्र है कि पार्टी में कोई विभाजन नहीं हो सकता। महाराष्ट्र में जो हुआ, वह गलत है। इसलिए, हम इस मामले में एक अर्जी लेकर यहां आए हैं। हमने स्पीकर को अर्जी सौंप दी है। हमें पूरा भरोसा है कि स्पीकर नियमों के मुताबिक ही काम करेंगे, जैसा कि उन्होंने अब तक किया है'।



न्याय में देरी का मतलब है न्याय न मिलना- टीएमसी सांसद
कीर्ति आजाद ने आगे कहा कि, 'हमने (लोकसभा) स्पीकर को एक अर्जी दी है। हमने इसे पहले ही उन्हें मेल के जरिए भेज दिया था। हम उन्हें इसकी हार्ड कॉपी देने गए थे। वे वहां नहीं थे, इसलिए हमने उनके ऑफिस से इसकी रिसीविंग ले ली। संविधान में अलग ग्रुप बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। महाराष्ट्र का मामला पिछले पांच वर्षों से कोर्ट में चल रहा है। न्याय में देरी का मतलब है न्याय न मिलना। हमें स्पीकर पर भरोसा है कि वे संविधान के अनुसार निष्पक्ष फैसला लेंगे...कोई अलग ग्रुप नहीं बनाया जा सकता...ममता बनर्जी ही पार्टी हैं। पार्टी सिर्फ 20 सांसदों या 60 विधायकों से नहीं बनती। यह जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से बनती है, न कि सिर्फ इन लोगों से। ममता बनर्जी ने ही इस पार्टी को खड़ा किया है'।



टीएमसी एक अखंड पार्टी है- सागरिका घोष
इसके बाद सांसद सागरिका घोष ने कहा, 'हमने (लोकसभा स्पीकर को) एक पत्र दिया है कि टीएमसी एक अखंड पार्टी है। आप लोकसभा के भीतर कोई अलग गुट नहीं बना सकते। यह संविधान के खिलाफ है... हमने पत्र में कहा है कि जो लोग टीएमसी को तोड़कर लोकसभा में अलग गुट बनाना चाहते हैं, वह संविधान के खिलाफ है। संविधान इसकी इजाजत नहीं देता। यह कानून के खिलाफ है। यह आपकी नैतिक कमजोरी को दिखाता है कि जब पार्टी हारती है, तो आप उस पार्टी, उस नेता और उस चुनाव चिह्न को छोड़ देते हैं, जिसके दम पर आप जीते थे'।



जनता सब देख रही है, वे आपको सबक सिखाएंगे- सागरिका घोष
वहीं, सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने कहा, 'यह शर्म की बात है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के वे नेता, जो ममता बनर्जी के चेहरे वाले पोस्टरों के साथ पार्टी के बैनर तले चुनाव जीते थे, अब हार के बाद पार्टी छोड़ रहे हैं। आपके सिद्धांत और आपकी विचारधारा कहां हैं? आपने चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा की आलोचना की और अब सत्ता के लिए उन्हीं के साथ जा रहे हैं। भाजपा ने पार्टियों को तोड़ने के लिए पैसे और बाहुबल का इस्तेमाल किया है, लेकिन असली शर्म की बात यह है कि टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने- यहां तक कि कई बार चुने गए नेताओं ने भी - भाजपा में शामिल होने के लिए अपने मूल्यों से समझौता कर लिया। जनता सब देख रही है। वे देखते हैं, याद रखते हैं और वे आपको सबक सिखाएंगे'।



अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। यह पत्र उन 'न्यूज रिपोर्ट' के बारे में है जिनमें कहा गया है कि टीएमसी के कुछ लोकसभा सांसद आपके कार्यालय को एक पत्र सौंप चुके हैं या सौंपने वाले हैं, जिसमें वे एआईटीसी के एक अलग समूह या गुट के तौर पर मान्यता मांग रहे हैं, जो विधायी दल से स्वतंत्र हो।'

"...मैं आपसे सम्मानपूर्वक अनुरोध करता हूं कि आप:
(i) इस पत्र को रिकॉर्ड पर लें;
(ii) एआईटीसी को एक ही राजनीतिक पार्टी मानें जिसका प्रतिनिधित्व सदन में केवल उसके अधिकृत नेता और व्हिप के ज़रिए होता है, और एआईटीसी के किसी भी कथित अलग समूह या गुट को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा न दें; और
(iii) यदि ऊपर बताई गई प्रकृति का कोई पत्र मिलता है, तो उस पर कोई भी निर्णय लेने से पहले एआईटीसी को अपनी बात रखने का मौका दें। साथ ही, सम्मानपूर्वक यह भी कहा जाता है कि एआईटीसी अपने अधिकारों को सुरक्षित रखती है, जिसमें संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उचित कार्यवाही शुरू करने का अधिकार भी शामिल है, यदि यहां बताए गए प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला कोई आचरण किया जाता है'।
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