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Derek O'Brien: 'एक रुपये नहीं मिलता, पूरा पैसा केंद्र रखती है', TMC नेता बोले- संघीय ढांचा खत्म कर रहा 'सेस'

Fri, 05 Sep 2025 02:12 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सेस संघीय ढांचे का गला घोंट रहा है। उन्होंने कहा कि सेस का पूरा पैसा केंद्र के पास जाता है और राज्यों को कुछ नहीं मिलता। 2012 में टैक्स राजस्व में सेस की हिस्सेदारी 7% थी, जो 2025 तक 20% हो जाएगी।
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डेरेक ओ ब्रायन - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सेस देश के संघीय ढांचे का गला घोंट रहा है। उन्होंने कहा कि इस टैक्स से राज्य सरकारों की हिस्सेदारी घटती जा रही है और केंद्र इसका पूरा पैसा अपने पास रखता है। ओ ब्रायन ने ब्लॉग पोस्ट के जरिए यह बात उठाई और चेतावनी दी कि राज्यों की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
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डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि जीएसटी के शोर-शराबे में सबसे खतरनाक शब्द है 'सेस'। उन्होंने बताया कि सेस का पूरा पैसा केंद्र सरकार के पास जाता है, राज्यों को इसमें से एक रुपये का भी हिस्सा नहीं मिलता। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2012 में केंद्र की टैक्स आमदनी में सेस की हिस्सेदारी 7 फीसदी थी, जो 2025 तक बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।

लाखों करोड़ रुपये पड़े हैं बेकार
टीएमसी नेता ने कहा कि साल 2019 से अब तक 5.7 लाख करोड़ रुपये का सेस और सरचार्ज उपयोग नहीं हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा शासित राज्यों समेत 22 राज्यों ने इस पर विरोध जताया था और 16वें वित्त आयोग से टैक्स का हिस्सा 41 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की मांग की थी। ओ ब्रायन ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रिपोर्ट बताती है कि 2011 में सकल कर राजस्व का 89 फीसदी हिस्सा राज्यों के साथ बांटा जाता था, लेकिन 2021 तक यह घटकर 79 फीसदी रह गया है।
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सेस की तेज़ी से बढ़ोतरी
डेरेक ओ ब्रायन ने दावा किया कि 2015 से 2024 के बीच लागू किए गए सेस में 462 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यानि यह रकम अब दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है। उन्होंने बताया कि सेस एक अतिरिक्त टैक्स है, जिसे किसी खास उद्देश्य के लिए लगाया जाता है, लेकिन इसकी रकम राज्यों के साथ साझा नहीं की जाती।

जीएसटी काउंसिल का नया फैसला
टीएमसी नेता ने पूर्व वित्त मंत्री अमित मित्रा का हवाला देते हुए कहा कि जीएसटी दरों में तर्कसंगत बदलाव तभी फायदेमंद है, जब आम जनता को इसका लाभ मिले। उन्होंने याद दिलाया कि जीएसटी को 18 फीसदी से ज्यादा नहीं रखने की सिफारिश संसदीय समिति ने 2015 में की थी। अब जाकर इसे लागू किया गया है। हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने 5 और 18 फीसदी की दो दरों को मंजूरी दी है, जो 22 सितंबर से लागू होंगी। हालांकि, विपक्षी राज्यों ने आशंका जताई कि इससे उन्हें राजस्व का बड़ा नुकसान होगा।
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राज्यों की आवाज दबाई गई?
ओ ब्रायन ने आरोप लगाया कि जीएसटी परिषद की बैठक में 11 मंत्रियों ने राज्यों को राजस्व की भरपाई करने की मांग की, लेकिन उनकी आवाज दबा दी गई। उन्होंने कहा कि केंद्र के राजस्व सचिव ने नुकसान 48 हजार करोड़ रुपये बताया, लेकिन असली असर सप्लाई चेन पर पड़ेगा और नुकसान एक लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है।

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