फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टीएमसी: बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC ने चुना नेता प्रतिपक्ष, शोभनदेव चट्टोपाध्याय को दी जिम्मेदारी

Sat, 09 May 2026 10:14 PM IST
Rahul Kumar एएनआई, नई दिल्ली।

सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष की अपनी टीम का एलान कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाया है। वहीं, असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विज्ञापन
वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय। - फोटो : आईएएनएस
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शनिवार को वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया। भाजपा की चुनावी जीत के बाद राज्य की राजनीति में हुए बड़े बदलाव के बीच पार्टी ने विधानसभा के लिए अपनी नई टीम का एलान किया है।

विज्ञापन


पार्टी ने असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता प्रतिपक्ष बनाया है, जबकि वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 82 वर्षीय शोभनदेव चट्टोपाध्याय जनवरी 1998 में पार्टी की स्थापना के समय से ही तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़े हुए हैं। वह राज्य की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं।

टीएमसी 'पार्टी विरोधी' बयानों पर 3 प्रवक्ताओं को किया निलंबित
तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी की अनुशासनहीनता के आरोप में अपने तीन प्रवक्ताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष और आलोचनाओं के बीच की गई है। पार्टी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता और कार्तिक घोष को पार्टी विरोधी बयानों के लिए निलंबित किया गया है। इन प्रवक्ताओं पर पार्टी की नीतियों और नेतृत्व के खिलाफ बोलने का आरोप है।
विज्ञापन


यह कदम पार्टी द्वारा पांच अन्य प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने के कुछ दिनों बाद लिया गया है। इन प्रवक्ताओं ने चुनाव परिणामों के बाद पार्टी नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं। भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों तक सिमट गई।

कारण बताओ नोटिस तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन द्वारा जारी किए गए थे, जो पार्टी की अनुशासन समिति के सदस्य हैं। निलंबित किए गए तीन नेताओं के अलावा, कृष्णेंदु चौधरी और पापिया घोष को भी नोटिस जारी किए गए थे। पार्टी ने उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था कि "पार्टी अनुशासन के उल्लंघन" के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।

पार्टी नेताओं के अनुसार, कुछ प्रवक्ताओं ने चुनावी हार के बाद सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के कामकाज और अभियान रणनीति पर सवाल उठाए थे। एक वरिष्ठ पार्टी नेता ने कहा कि ये टिप्पणियां सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया बातचीत के दौरान भी की गईं।

कोहिनूर मजूमदार ने पत्रकारों से कहा था कि तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से मिलने के लिए पार्टी नेताओं को अक्सर घंटों इंतजार करना पड़ता है। मालदा के वरिष्ठ नेता कृष्णेंदु चौधरी ने भी डायमंड हार्बर से सांसद की कार्यशैली की आलोचना की थी। रिजू दत्ता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में चुनाव के बाद हिंसा को नियंत्रित करने के लिए भाजपा सरकार के उपायों की प्रशंसा की थी, जिससे वह चर्चा में आए थे।

हार के बाद ममता बनर्जी ने भाजपा विरोधी ताकतों से एकजुट होने का किया आह्वान
 पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सामने आईं और उन्होंने पूरे देश में भाजपा को रोकने के लिए सामान्य विचारधारा की पार्टियों को एकजुट होने का आह्वान किया। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी भाजपा विरोधी राजनीतिक ताकतों- चाहे वे वामपंथी हों या दक्षिणपंथी- से तृणमूल कांग्रेस के साथ एकजुट होने की अपील की।  उन्होंने कहा, "राज्य में हर जगह चुनाव के बाद हिंसा की गूंज सुनाई दे रही है। मैं सभी भाजपा विरोधी ताकतों, सभी छात्र और युवा संगठनों, और सभी गैर-सरकारी संगठनों से एकजुट होने का आह्वान करती हूं। हम भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहते हैं।"

इस अवसर पर उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यहां तक कि उनकी कभी रही कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सीपीआई(एम) और पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा का भी भाजपा के खिलाफ पश्चिम बंगाल में बनने वाले इस संयुक्त मोर्चे में स्वागत योग्य हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "वामपंथी, धुर-वामपंथी और कोई भी अन्य राष्ट्रीय पार्टी स्वागत योग्य है। आइए हम सब एक साथ आएं, एकजुट हों। कोई भी मुझसे संपर्क करने के लिए स्वागत योग्य है। अब से मैं हर दिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक अपने कार्यालय में रहूंगी। मेरा पहला दुश्मन दुश्मन है।"

ममता बनर्जी के इस आह्वान पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो सदस्य और पार्टी के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मो. सलीम ने गुरुदेव की दो पंक्तियां पढ़ीं- जीबोनो जोखोन शुकाये जाई, करुणा धाराई एशो" (जब जीवन सूख लगे तो करुणा की धारा बनकर आओ)। 

टैगोर की इस महत्वपूर्ण कविता का महत्व यह है कि ममता बनर्जी को अन्य भाजपा-विरोधी ताकतों की अहमियत का एहसास तब हुआ, जब हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और खुद ममता बनर्जी को भी भवानीपुर सीट पर नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से शिकस्त मिली।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें