पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास का समर्थन किया है। बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के बैंक खाते पर रोक लगाने की मांग की थी।
ऋतब्रत बनर्जी ने क्या कहा?
ऋतब्रत बनर्जी ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में कहा, अरूप बिस्वास के पत्र में दम है। क्या गारंटी है कि इस खाते में चोरी का या गबन किया हुआ पैसा नहीं है? मैं तृणमूल का खाते पर रोक लगाने की मांग का समर्थन करता हूं।
असली टीएमसी स्थापित करने की कोशिश
एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक, इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी अपने गुट को 'असली' तृणमूल कांग्रेस के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर तब जब पार्टी नेतृत्व के खिलाफ लगभग 58 विधायकों ने बगावत कर दी है।
अरूप बिस्वास ने क्या मांग की?
विपक्ष के नेता की यह प्रतिक्रिया तब आई, जब पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के बैंक खाते के कामकाज पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। तृणमूल कांग्रेस के पूर्व मंत्री बिस्वास ने इस पत्र में बैंक अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे पैसे निकालने पर रोक लगाएं और खाते में यथास्थिति बनाए रखें, जब तक कि पार्टी के नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर चल रहा विवाद सुलझ नहीं जाता।
बैंक को भेजे पत्र में अरूप ने खुद को बताया टीएमसी का कोषाध्यक्ष
यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में हार के बाद पांच जून को टीएमसी ने संगठनात्मक फेरबदल की घोषणा की थी और बिस्वास की जगह पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष बनाया था। हालांकि, बैंक को भेजे अपने पत्र में बिस्वास ने दावा किया कि वे अभी भी पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं।
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तृणमूल कांग्रेस का एक निजी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा में खाता है। पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, इस खाते में 675 करोड़ रुपए जमा हैं। बिस्वास के पत्र पर 12 जून की तारीख थी। लेकिन बैंक को यह 16 जून को मिला।
पत्र में बिस्वास ने पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों के दावों से पैदा हुई अनिश्चितता की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि विरोधी गुट खुद को तृणमूल कांग्रेस का असली प्रतिनिधि बता रहे हैं, जिससे यह भ्रम पैदा हो रहा है कि पार्टी का बैंक खाता चलाने के लिए कौन अधिकृत है। उन्होंने बैंक से कहा कि वे अनधिकृत व्यक्तियों की ओर से पैसे निकालने या अन्य लेन-देन को रोकें। उन्होंने साथ ही पहले से हस्ताक्षर किए गए चेक के गलत इस्तेमाल से बचाव के उपाय भी करने को कहा।