जगन मोहन रेड्डी, चंद्रबाबू नायडू
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आंध्र प्रदेश में तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद के लिए इस्तेमाल की जाने वाली घी में मिलावट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पिछली सरकार (वाईएसआरसीपी) पर प्रसाद में जानवारों की चर्बी मिलाने का आरोप लगाया था। हालांकि, गुजरात में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को परीक्षण के लिए भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट में प्रसाद के लिए इस्तेमाल की जाने वाली घी में जानवरों की चर्बी और मछली के तेल होने की पुष्टि की गई है। इस रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू लगातार वाईएसआरसीपी को घेर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने मिलावटी घी का इस्तेमाल किया, क्योंकि यह सस्ता था। हालांकि, इस मामले में घिरने के बाद पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को चिट्ठी लिखेंगे।
तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद मामले में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा, "जब बाजार में घी की कीमत 500 रुपये किलो थी, तब पिछली सरकार ने खटिया घी 320 रुपये में खरीदा। हमने घी सप्लायर बदल दिया है। अब हम कर्नाटक के नंदिनी ब्रांड के घी का इस्तेमाल कर रहे हैं। नायडू ने आगे कहा, लोग कह रहे हैं कि उनकी भावनाएं आहत हुई हैंजब यह गलती हो गई तो क्या मुझे उन्हें छोड़ देना चाहिए?"
हालांकि, हालांकि, इससे पहले आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने मौजूदा सीएम पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के 100 दिनों के शासन से ध्यान भटकाने के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि नायडू की सोच सियासत के लिए भगवान के इस्तेमाल करने जैसी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखेंगे। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें विस्तार से बताऊंगा कि कैसे चंद्रबाबू नायडू मामले को घूमा रहे हैं। ऐसा करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।"
चंद्रबाबू नायडू ने किया था दावा
चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती में एनडीए विधायक दल की बैठक में दावा किया था कि तिरुमाला लड्डू भी घटिया सामग्री से बनाया गया था। वे घी के बदले जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने आगे कहा कि अब शुद्ध घी का इस्तेमाल किया जाता है और मंदिर में सभी चीजों को सैनेटाइज कर दिया गया है। बता दें कि इस मामले में केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है और कहा कि एफएसएसएआई लैब रिपोर्ट की जांच करेगा।