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टीपू सुल्तान विवाद में कूदे अमित शाह, कहा-वोट बैंक की राजनीति कांग्रेस को पड़ेगी महंगी

Thu, 02 Nov 2017 05:30 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी कूद पड़े हैं। अमित शाह ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि राज्य में कांग्रेस सरकार टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर जानबूझकर विवाद खड़ा कर रही है। 
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शाह ने कहा कि कांग्रेस टीपू सुल्तान की जयंती पर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह वोट बैंक की राजनीति महंगी पड़ेगी जिसका कि कर्नाटक की जनता को कोई फायदा नहीं होगा।

शाह ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर हमलावर होते हुए सीएम सिद्घारमैया से सवाल किया कि उनकी सरकार में करीब 10 आरएसएस और भाजपा कार्यकताओं की हत्याएं हो चुकी है। शाह ने इन हत्याओं पर सिद्घारमैया से जवाब मांगा है। 
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Celebrating #TipuJayanti & doing vote bank politics will not benefit people of Karnataka: Amit Shah in Bengaluru pic.twitter.com/xsELrBkOJl — ANI (@ANI) November 2, 2017

 
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केंद्रीय मंत्री ने सरकार को खत लिखकर टीपू सुल्तान को बताया था हिंदुओं का हत्यारा

कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर विवाद राजनीतिक विवाद चल रहा है। राज्य की सिद्धारमैया सरकार10 नवंबर को टीपू सुल्तान की जयंती मनाने के लिए कार्यक्रम करना चाहती है जिसका बीजेपी और उनके कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध किया जा रहा है। बीजेपी टीपू को 'अत्याचारी' बताते हुए कह रही है कि कांग्रेस यह काम अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए कर रही है।

ऐसे में भाजपा नेता और केंद्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े का हाल ही में एक खत भी सामने आया। खत में उन्होंने सिद्धारमैया के सचिव को लिखकर कहा था कि टीपू सुल्तान से संबंधित किसी कार्यक्रम में उनको ना बुलाया जाए। हेगड़े इससे पहले 2016 में भी मैसूर के राजा रहे टीपू सुल्तान का जन्मदिवस मनाने का विरोध कर चुके हैं।

पत्र में उन्होंने लिखा था कि टीपू सुल्तान अत्याचारी था और उसने हजारों हिंदुओं का कत्ल और काडागू के लोगों पर अत्याचार किया था। इसके उलट, कांग्रेस दावा करती रही है कि टीपू सुल्तान स्वतंत्रता सैनानी थे और यह काम अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए नहीं किया जा रहा।

मामले के बढ़ने पर सिद्धारमैया ने कहा था कि कार्यक्रम का न्योता राज्य और केंद्र सरकार के सभी नेताओं को भेजा जाएगा जिसको स्वीकार और नकार देना उनकी मर्जी है। सिद्धारमैया ने टीपू के पक्ष में कहा कि ब्रिटिश के खिलाफ देश ने चार युद्ध लड़े और उन चारों में टीपू ने हिस्सा लिया था।
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