त्रिपुरा में मुख्य विपक्षी दल टिपरा मोथा ने शुक्रवार को कहा कि वह पांच सितंबर को दो विधानसभा क्षेत्रों के लिए होने वाले उपचुनाव में किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं करेगी। पार्टी ने कहा कि वह सिपाहीजला जिले की धनपुर और बॉक्सानगर सीटों पर होने वाले उपचुनाव से दूर रहेगी।
पार्टी अध्यक्ष बीके ह्रांगखॉल ने कहा कि टिपरा मोथा ने उपचुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। हम पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से उपचुनाव में किसी विशेष उम्मीदवार के लिए वोट करने के लिए नहीं कहेंगे। भाजपा ने बॉक्सानगर विधानसभा सीट के लिए तफज्जल हुसैन और धनपुर क्षेत्र के लिए बिंदू देबनाथ को उम्मीदवार बनाया है।
टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत देबबर्मा ने 26 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उपचुनावों से पहले स्वदेशी लोगों के अधिकारों और कल्याण पर चर्चा की, जिसमें मुख्य प्रतियोगी भाजपा और सीपीआई (एम) से हैं। वाम दल ने हाल ही में टिपरा मोथा के साथ चर्चा की थी और उपचुनावों के लिए उसका समर्थन मांगा था, जिसमें कांग्रेस चुनाव नहीं लड़ रही है।
विपक्ष के नेता अनिमेष देबबर्मा ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक अपनी पसंद के अनुसार अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उपचुनाव पूर्वोत्तर राज्य के आदिवासियों के लिए अलग ग्रेटर टिपरालैंड राज्य की मांग से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं।
नगालैंड वन अधिनियम और यूसीसी लागू करने को तैयार नहीं
सरकार के प्रवक्ता और संसदीय मामलों और बिजली मंत्री केजी केन्ये ने शुक्रवार को कहा कि नगालैंड सरकार वन संरक्षण (संशोधन) अधिनियम और प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री के आवासीय परिसर में राज्य के शीर्ष आदिवासी निकायों और नागरिक समाज संगठनों के साथ सरकार की एक परामर्शी बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए केन्ये ने कहा कि कई नागा नागरिक समाजों और बुद्धिजीवियों ने चिंता व्यक्त की है कि ये अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 371ए के तहत गारंटीकृत विशेष अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं। अनुच्छेद 371ए नागालैंड में नागाओं को धार्मिक और सामाजिक प्रथाओं और भूमि और उसके संसाधनों के स्वामित्व और हस्तांतरण पर विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, बैठक के दौरान आदिवासी निकायों और नागरिक समाजों ने राज्य सरकार से राज्य में दोनों अधिनियमों को लागू नहीं करने का आग्रह किया। केन्ये ने कहा कि राज्य सरकार 11 से 14 सितंबर तक निर्धारित विधानसभा के मानसून सत्र में अधिनियमों की निंदा करने के लिए एक प्रस्ताव लाएगी।