फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Support: 'एक देश, एक चुनाव' पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों का मिला साथ, बोले- यह एक अच्छा विचार लेकिन...

Fri, 01 Sep 2023 10:27 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्व सीईसी रहे ओपी रावत ने कहा कि यह संभव है और किया जा सकता है। आपको बस एक रोडमैप बनाने और उसके अनुसार काम करने की जरूरत है।
विज्ञापन
मतदान - फोटो : pti
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश में इन दिनों 'एक देश, एक चुनाव' को लेकर बहस छिड़ी हुई है, कोई दल इसके समर्थन में है तो कोई इसके खिलाफ है। वहीं, 'एक देश, एक चुनाव' पर दो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों ने अपनी बात रखी है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि  लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने का विचार अच्छा है, लेकिन यह एक विशाल कार्यक्रम है इसका सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी ढांचा और रोडमैप जरूरी है।

विज्ञापन


पूर्व सीईसी में से एक ने चुनाव आयोग के लिए कहा कि एक साथ चुनाव सुविधाजनक और तार्किक दोनों हैं। लेकिन कई लोगों का तर्क है कि बार-बार चुनाव होना इतना भी बुरा नहीं है। 30 जुलाई, 2010 और 10 जून, 2012 के बीच चुनाव पैनल का नेतृत्व करने वाले एस वाई कुरैशी ने कहा कि लोकतंत्र का त्योहार गरीबों का त्योहार है क्योंकि वोट ही उनके पास एकमात्र शक्ति है।

वहीं, 23 जनवरी 2018 से 1 दिसंबर 2018 के बीच सीईसी रहे ओपी रावत ने कहा कि यह संभव है और किया जा सकता है। आपको बस एक रोडमैप बनाने और उसके अनुसार काम करने की जरूरत है। सभी राजनीतिक दलों को इस पर एक साथ आना चाहिए। उनके समर्थन के बिना संशोधन संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर सभी पार्टियां एक साथ नहीं होंगी तो इससे लोगों में गलत संदेश जाएगा और वे इसे लेकर सशंकित हो जाएंगे
विज्ञापन


पहले भी देश में हो चुका है 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' 
मुख्य चुनाव आयुक्त रहे ओपी रावत ने याद दिलाया कि जब पोल पैनल से एक साथ चुनाव के बारे में पूछा गया था, तो उसने सरकार को सूचित किया था कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' 1952, 1957, 1962, 1967 में हुआ था और यह संभव है कि इसे दोबारा किया जाए। दूसरे, चुनाव आयोग ने बताया कि इसे फिर से सिंक्रनाइज करने के लिए संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में कुछ संशोधन करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ईवीएम के लिए अधिक धन आवंटित करने की जरूरत है और चुनाव के दौरान अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाने की जरूरत है। अगर ये चीजें होती हैं तो 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' कराना संभव होगा। कुरैशी का विचार था कि जब तक बहस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचती, तब तक धन और चुनाव के समय में कटौती के वैकल्पिक समाधानों पर तत्काल विचार किया जाना चाहिए।

2024 के लोकसभा चुनावों से पहले या आसपास इन राज्य विधानसभों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा
कम से कम दस राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल 2024 में आम चुनावों के लिए निर्धारित समय से पहले या उसके आसपास समाप्त हो जाएगा। जबकि पांच राज्यों - मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, मिजोरम और छत्तीसगढ़- में विधानसभा चुनाव हैं। इस साल के अंत तक आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और झारखंड में लोकसभा चुनाव के साथ चुनाव होने की संभावना है।
विज्ञापन


विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए शर्तें पूरी करने का अस्थायी कार्यक्रम नीचे सूचीबद्ध है।

1. मिजोरम: दिसंबर 2023
2. छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना: जनवरी 2024
3. आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम: जून 2024
4. हरियाणा, महाराष्ट्र: नवंबर 2024
5. झारखंड: दिसंबर 2024
6. दिल्ली: फरवरी 2025
7. बिहार: नवंबर 2025
8. असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल: मई 2026
9. पुडुचेरी: जून 2026
10.गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड: मार्च 2027
11.उत्तर प्रदेश: मई 2027
12. गुजरात, हिमाचल प्रदेश: दिसंबर 2027
13. मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा: मार्च 2028
14. कर्नाटक: मई 2028

जम्मू-कश्मीर यूटी का कार्यकाल पूरा होने पर अभी भी कोई स्पष्टता नहीं है, जिसका गठन 2018 में पूर्ववर्ती विधानसभा भंग होने के बाद हुआ था।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें