सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जज लोया की मौत के मामले पर सुनवाई करते हुए मामले की एसआईटी जांच से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच के लिए दायर की गई याचिका का आधार कमजोर हैं, इसलिए उसकी मांगों को स्वीकारा नहीं जा सकता। आइए आपको बताते हैं आखिर मामले में कब क्या-क्या हुआ...?
मौत और उठे सवाल
1 दिसंबर, 2014 : जस्टिस लोया की कार्डिक अरेस्ट से नागपुर में मौत। वह अपने सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने गए थे।
नवंबर, 2017 : यह मामला चर्चा में आया जब जस्टिस लोया की बहन के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी मृत्यु की परिस्थितियां संदिग्ध थीं। उन्होंने इसे सोहराबुद्धीन केस से जोड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
11 जनवरी, 2018 : सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाओं की सुनवाई के लिए राजी हुआ, जिसमें लोया की मृत्यु की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
12 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने लोया की मृत्यु को संदिग्ध बताने वाले आरोपों को गंभीर मामला बताया और महाराष्ट्र सरकार से रिपोर्ट मांगी।
16 जनवरी : सुप्रीम कोर्ट ने कहा महाराष्ट्र सरकार फैसला ले सकती है कि लोया की मृत्यु से जुड़े कौन से कागजात याचिकाकर्ताओं को दिए जा सकते हैं।
22 जनवरी : लोया संबंधी याचिका को गंभीर मुद्दा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बाम्बे हाईकोर्ट से दो याचिकाएं अपने पास स्थानांतरित कर लीं।
31 जनवरी : पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल (रिटायर्ड) एल रामदास सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जजों और पूर्व पुलिस अधिकारियों से केस की जांच कराने की मांग की।
2 फरवरी : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट सिर्फ जस्टिस लोया की मृत्यु मामले की सुनवाई करेगा, अमित शाह के सोहाराबुद्दीन केस से आरोप मुक्त होने की जांच नहीं होगी।
5 फरवरी : मुंबई के वकीलों के एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और केस से जुड़े दो जजों समेत 11 लोगों से जिरह की मांग की।