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जस्टिस लोया केसः मौत पर उठे सवाल से सुप्रीम के फैसले तक पढ़िए कब क्या हुआ

Thu, 19 Apr 2018 05:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जज लोया की मौत के मामले पर सुनवाई करते हुए मामले की एसआईटी जांच से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच के लिए दायर की गई याचिका का आधार कमजोर हैं, इसलिए उसकी मांगों को स्वीकारा नहीं जा सकता। आइए आपको बताते हैं आखिर मामले में कब क्या-क्या हुआ...?
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मौत और उठे सवाल

1 दिसंबर, 2014 : जस्टिस लोया की कार्डिक अरेस्ट से नागपुर में मौत। वह अपने सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने गए थे।

नवंबर, 2017 : यह मामला चर्चा में आया जब जस्टिस लोया की बहन के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी मृत्यु की परिस्थितियां संदिग्ध थीं। उन्होंने इसे सोहराबुद्धीन केस से जोड़ा था। 

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

11 जनवरी, 2018 : सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाओं की सुनवाई के लिए राजी हुआ, जिसमें लोया की मृत्यु की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। 

12 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने लोया की मृत्यु को संदिग्ध बताने वाले आरोपों को गंभीर मामला बताया और महाराष्ट्र सरकार से रिपोर्ट मांगी।
 
16 जनवरी : सुप्रीम कोर्ट ने कहा महाराष्ट्र सरकार फैसला ले सकती है कि लोया की मृत्यु से जुड़े कौन से कागजात याचिकाकर्ताओं को दिए जा सकते हैं। 

22 जनवरी : लोया संबंधी याचिका को गंभीर मुद्दा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बाम्बे हाईकोर्ट से दो याचिकाएं अपने पास स्थानांतरित कर लीं। 

31 जनवरी : पूर्व नौसेना प्रमुख  एडमिरल (रिटायर्ड) एल रामदास सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जजों और पूर्व पुलिस अधिकारियों से केस की जांच कराने की मांग की।
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2 फरवरी : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट सिर्फ जस्टिस लोया की मृत्यु मामले की सुनवाई करेगा, अमित शाह के सोहाराबुद्दीन केस से आरोप मुक्त होने की जांच नहीं होगी।
 
5 फरवरी : मुंबई के वकीलों के एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और केस से जुड़े दो जजों समेत 11 लोगों से जिरह की मांग की। 
 
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महाराष्ट्र सरकार का विरोध


9, फरवरी : महाराष्ट्र सरकार ने जांच की मांग का विरोध किया और इसे प्रेरित और पीत पत्रकारिता करार दिया। 

12, फरवरी : महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जस्टिस लोया के साथ अंतिम दिन मौजूद चार जजों ने उनकी मृत्यु को प्राकृतिक बताया था। ये बयान स्पष्ट थे।

याचिकाकर्ताओं के वकीलों और अन्य के आरोप

19 फरवरी : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह लोया केस को बेहद गंभीरता से देख रही है। उसी दिन याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि उन पर केस छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है।
 
5 मार्च : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बांबे हाईकोर्ट का रोस्टर बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है और हाईकोर्ट में सोहराबुद्दीन शेख केस की सुनवाई कर रहे जज को बदलने पर सवाल नहीं उठने चाहिए। 

8 मार्च : सुप्रीम कोर्ट ने उन आरोपों पर नाराजगी जताई, जिसमें वरिष्ठ वकीलों का कहना था कि जज सिर्फ याचिकाकर्ताओं से सवाल कर रहे हैं, न की महाराष्ट्र सरकार से। 

9 मार्च : महाराष्ट्र सरकार ने कथित आरोपों पर हमला बोला और कहा कि कुछ वकील इस केस में जजों को धमका रहे हैं। न्यायपालिका और न्यायिक अधिकारियों को इनसे बचना चाहिए। 

9 मार्च : एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लेजिस्लेशन ने कहा कि आशंका है कि जस्टिस लोया की मृत्यु जहर देने से हुई हो क्योंकि उनके सीने में जकड़न की शिकायत थी।  

12 मार्च : मुंबई के वकीलों के एक संगठन ने बांबे हाईकोर्ट का एक आदेश सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया और आरोप लगाया कि जज लोया केस में जिन दो जजों ने बयान दिए हैं, उनमें से एक जज ने एक वरिष्ठ भाजपा नेता के खिलाफ आपराधिक मामले के निपटारे का आदेश दिया था। 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

16 मार्च : सुप्रीम कोर्ट ने मृत्यु पर जांच का फैसला रिजर्व रखा। 

19 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट जांच की याचिका ठुकरा दी।
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