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आखिरी सांस तक कांग्रेस के लिए अहमद पटेल के बिना पार्टी की कल्पना करना कठिन

Thu, 26 Nov 2020 02:29 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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अहमद पटेल - फोटो : पीटीआई
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दिल्ली के मदर टेरेसा मार्ग पर 23 नंबर बंगला देशभर के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक तरह सेफ्टी वॉल्व था। जहां नाराज, और गांधी परिवार तक पहुंच न रखने वाले पहुंचते और कुछ न कुछ समाधान के साथ लौटते थे। यही कारण है कि अहमद पटेल के निधन की जानकारी मिलते इस बंगले में तमाम नेता और कार्यकर्ता जुटने लगे।

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राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष सहित नेताओं ने निधन पर जताया दुख 
मुश्किल से मुश्किल दौर और अपनी आखिरी सांस तक कांग्रेस के लिए जीए अहमद पटेल के निधन पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष सहित सभी दलों के नेताओं ने दुख जताया है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि उनके बिना पार्टी की कल्पना करना मुश्किल है।

गांधी परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच की सबसे मजबूत कड़ी टूटी
तीन बार लोकसभा, पांच बार राज्यसभा सदस्य रहे पटेल के निधन से कांग्रेस के भीतर वह सेतु टूट गया जो गांधी परिवार के लिए राजनीतिक सलाहकार के साथ दूसरे छोर पर खड़े कार्यकर्ता को पार्टी से जोड़ता था। पटेल 1977 में गुजरात से सांसद बनकर आए और राजनीतिक सूझबूझ, सरल स्वभाव, सुलभता और कुशल प्रबंधन के कारण गांधी परिवार के करीब होते गए।
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इंदिरा गांधी के निधन के बाद राजीव गांधी के राजनीतिक सलाहकारों की तिकड़ी में अहमद पटेल, अरुण सिंह और ऑस्कर फर्नांडीज थे। राजीव गांधी 1984 में पीएम बने तो पटेल को पार्टी का संयुक्त सचिव बनाए गया। बाद में पार्टी महासचिव बने।

राजीव के निधन के बाद पार्टी से गांधी परिवार की पकड़ खत्म हुई और 1991 में नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तो पटेल अलग-थलग पड़ गए। कांग्रेस कार्यसमिति के अलावा उनसे पार्टी की सभी जिम्मेदारियां ले ली गईं। राव ने उन्हें मंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

सोनिया के सलाहकार, राहुल के कोषाध्यक्ष
सोनिया के अध्यक्ष बनने के बाद 2004 में यूपीए सरकार बनी तो एक बार फिर पटेल ने मंत्री बनने से इनकार किया। वह लंबे समय तक सोनिया के राजनीतिक सलाहकार रहे। राहुल अध्यक्ष बने तो उन्हें राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया।

अहमद पटेल आज भी गांधी परिवार के लिए संकटमोचक की भूमिका में दिखते थे। बीते दिनों 23 असंतुष्ट नेताओं के पत्र से मचे घमासान के बाद कार्यसमिति की बैठक में अहमद पटेल के सुझाए विकल्प ने संकट टाल दिया था। राजस्थान में बगावत करने वाले सचिन पायलट भी अपनी समस्या कहने अहमद पटेल के पास गए थे।

दक्ष सांसद, कुशल रणनीतिकार : रामनाथ कोविंद
कांग्रेस नेता अहमद पटेल के निधन से व्यथित हूं। वह एक दक्ष सांसद और कुशल रणनीतिकार थे। उनका सौम्य और मिलनसार व्यक्तित्व ही था जिसकी वजह से हर राजनीतिक दल में उनके मित्र थे। उनके परिजनों और मित्रों के प्रति मेरी संवेदनाएं।   - रामनाथ कोविंद, राष्ट्रपति

अनुभवी, सद्भावपूर्ण नेता : नायडू
अहमद पटेल के निधन से स्तब्ध हूं। पटेल अपने संसदीय अनुभव, सद्भाव और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए जाने जाते थे।    - वेंकैया नायडू, उपराष्ट्रपति

उनकी आत्मा को शांति मिले : नरेंद्र मोदी
पटेल ने सार्वजनिक जीवन में लंबा समय बिताया और जनसेवा की। उन्होंने कांग्रेस को मजबूत बनाने में जो भूमिका निभाई उसे हमेशा याद रखा जाएगा। अहमद भाई की आत्मा को शांति मिले। - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

कांग्रेस के लिए अपूरणीय क्षति : मनमोहन सिंह
अहमद पटेल कांग्रेस के सबसे विश्वसनीय नेताओं में से एक और मेरे बेहतरीन दोस्त थे। उनका जाना कांग्रेस पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है।
- मनमोहन सिंह, पूर्व पीएम

उनका पूरा जीवन कांग्रेस को समर्पित: सोनिया गांधी
अहमद पटेल के जाने से मैंने एक ऐसा सहयोगी खो दिया जिनका पूरा जीवन कांग्रेस को समर्पित था। मैंने ऐसा कामरेड, निष्ठावान सहयोगी और मित्र खो दिया जिनकी जगह कोई नहीं ले सकता। - सोनिया गांधी, अध्यक्ष कांग्रेस
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सार्वजनिक जीवन में बड़ा योगदान : अमित शाह
वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल के निधन से स्तब्ध हूं। उनका कांग्रेस पार्टी और सार्वजनिक जीवन में बहुत योगदान रहा। - अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

अहमद पटेल एक ऐसे स्तंभ थे जो सबसे मुश्किल दौर में भी पार्टी के साथ खड़े रहे।   - राहुल गांधी, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष

दिग्गज कांग्रेस नेता और मित्र अहमद पटेल के निधन से स्तब्ध और दुखी हूं। यह कांग्रेस और मेरे जैसे कार्यकर्ताओं के लिए बहुत बड़ी क्षति है।
- अशोक गहलोत, सीएम राजस्थान

अहमद पटेल जी समर्पित कार्यकर्ता, पार्टी की मजबूत धुरी थे और मुश्किल समय में पार्टी को आगे बढ़ाया। हम उनकी कमी महसूस करेंगे।
- कैप्टन अमरिंदर सिंह, सीएम पंजाब

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