असम के नामेरी टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण अभियान ने बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2022 में जहां यहां केवल तीन बाघ थे, वहीं 2025 के अंत तक उनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने भी इस आकलन की पुष्टि की है।
असम के नामेरी टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। वर्ष 2022 में जहां इस रिजर्व में केवल तीन बाघ थे, वहीं 2025 के अंत तक उनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। महज तीन वर्षों में बाघों की संख्या में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी पुष्टि भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने भी की है।
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Forest Conservation efforts under the guidance of Hon'ble CM @himantabiswa is doing wonders !
From just 3 tigers in 2022 to 12 by the end of 2025, Nameri Tiger Reserve has scripted a remarkable conservation success, validated by the Wildlife Institute of India.
वन मंत्री ने उपलब्धि पर क्या कहा?
असम के वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने शुक्रवार को यह जानकारी साझा करते हुए इसे राज्य के वन्यजीव संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता लगातार किए गए संरक्षण प्रयासों, बेहतर वन प्रबंधन और बाघों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल आवास उपलब्ध कराने का परिणाम है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में चलाए गए संरक्षण अभियानों को भी दिया।
सोनाई-रूपाई अभयारण्य में कितने दिनों बाद लौटे बाघ?
मंत्री ने बताया कि नामेरी टाइगर रिजर्व के सैटेलाइट कोर क्षेत्र सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य में भी दशकों बाद दो बाघों की वापसी दर्ज की गई है। इसे पूर्वोत्तर भारत में बाघों के प्राकृतिक आवास के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक संकेत माना जा रहा है।
कितने वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है अभयारण्य?
नामेरी टाइगर रिजर्व में नामेरी राष्ट्रीय उद्यान, सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य तथा नदुआर और बालीपाड़ा आरक्षित वन शामिल हैं। लगभग 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला नामेरी राष्ट्रीय उद्यान इस रिजर्व का मुख्य कोर क्षेत्र है, जबकि करीब 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य इसका सैटेलाइट कोर क्षेत्र है।
विशेषज्ञों ने बताई सफलता की वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि रिजर्व में शिकार पर प्रभावी नियंत्रण, वन सुरक्षा को मजबूत करने, प्राकृतिक आवास के संरक्षण और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए किए गए प्रयास सफल रहे हैं। यह उपलब्धि देश के बाघ संरक्षण कार्यक्रम के लिए भी बेहद उत्साहजनक मानी जा रही है।