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आदमखोर बाघों ने 7 को मारा, पीलीभीत में 'टाइगर कर्फ्यू'

Sun, 19 Feb 2017 06:59 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पास रहने वाले 30 गांवों में दहशत का छाया हुआ है। तीन महीने में आदमखोर बाघों द्वारा 7 लोगों को मार डाले जाने के बाद इलाके में 'टाइगर कर्फ्यू' जैसे हालात बन गए हैं। डर का आलम ये है कि किसान अब अपने खेतों में जाने से घबराने लगे हैं, सिर्फ दिन के समय रोशनी में झुंड बनाकर खेतों की ओर जाते हैं और साथ में जो भी हथियार हाथ आता है, ले जाते हैं। 
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आदमखोर बाघों के डर से बच्चों को सुरक्षा और निगरानी में स्कूल भेजा जाता है या घर में ही रखा जा रहा है। इस स्थिति में ग्रामीणों ने वोट डालने से मना कर दिया है। ग्रामीणों ने सरकार से कहा है कि 'वे बाघों से वोट डलवा लें, क्योंकि यहां बाघों का ही राज है।' 

28 नवंबर के बाद से 6 लोगों को मार चुके एक बाघ को वन विभाग की टीम ने दवाई के माध्यम से बेहोश कर 11 फरवरी को लखनऊ के चिड़ियाघर भिजवा दिया। हालांकि इसके बाद 16 फरवरी को एक और व्यक्ति मारा गया, लेकिन वन विभाग की टीम ने इस बार बाघ को पकड़ने से मना कर दिया।
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जिला वन अधिकारी कैलाश प्रकाश ने कहा, 'इस मामले में मारी गई महिला टाइगर रिजर्व की दीवार फांदकर 300 मीटर अंदर चली गई थी, जहां वह मारी गई। बाघ ने बस्ती के इलाके में प्रवेश नहीं किया।'
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ग्रामीणों ने छोड़ दी है खेतों की निगरानी

- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन उनकी अनदेखी कर रहा है। पीपरिया संतोष गांव के प्यारे लाल कहते हैं, 'आमतौर पर स्थानीय लोग गन्ने की खेती करते हैं और शाम को जंगली जानवरों से रखवाली के लिए खेत पर जाते हैं। अब हमारे पास केवल दिन का समय है। हथियार और लाठी के साथ हम शाम 5 बजे तक लौट आते हैं। शाम को कोई भी सुरक्षित नहीं है।'

गांव के दो लोगों को बाघों ने अपना शिकार बनाया है। ग्रामीणों का दावा है कि शुक्रवार की शाम एक दूसरे बाघ को खेतों में देखा गया है। गुरुवार को मेवातपुर गांव में 55 वर्षीय कलावती को बाघों ने अपना शिकार बना डाला। इसके बाद से डर के मारे ग्रामीणों की हालत बेहद खराब है। 

कलावती के बेटे राम लड़ैत ने कहा, 'यहां से एक किलोमीटर की दूरी पर जंगल शुरु होता है। दो दिनों से कोई भी ग्रामीण अपने खेतों की ओर नहीं गया है। फसल मायने नहीं रखती, हर कोई अपनी जिंदगी को लेकर डरा हुआ है।'
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