देश में बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है। फिलहाल भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 3 हजार 167 हो गई है। वहीं बाघ के सर्वे को लेकर एक दिलचस्प खुलासा हुआ है। बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अनुसार पिछले साल किया गया अखिल भारतीय बाघ आकलन अब तक का सबसे व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षण है। इसमें 20 राज्यों को शामिल किया गया है। साथ ही 6,41,449 किलोमीटर बाघ के पंजों का एक प्रभावशाली सर्वे किया गया है।
तीन लाख आवासों का लिया नमूना
बाघ पर किए गए अध्ययन की टीम में एनटीसीए व राज्यों के अधिकारी, विशेषज्ञ, अनुसंधान जीवविज्ञानी, वैज्ञानिक, समन्वयक, इंटर्न और स्वयंसेवक शामिल थे। अध्ययन के लिए टीम ने वनस्पति और मानव प्रभावों पर आंकड़ा पाने के लिए 3,24,003 आवास भूखंडों का नमूना लिया था।
पीएम मोदी ने रिपोर्ट की जारी
रविवार को मैसूर में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टेट्स ऑफ टाइगर्स 2022 नामक एक रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार 32 हजार से अधिक जगह पर कैमरा लगाए गए, जिनका परिणाम देखने लायक था। असल में, 32,588 स्थानों पर लगाए गए कैमरे से 4,70,81,881 प्रभावशाली तस्वीरें मिलीं, जिनमें बाघों की 97,399 तस्वीरें शामिल हैं। इस अध्ययन को पूरा करने में 6,41,102 से अधिक दिन लगे। साथ ही सर्वे की टीम ने परिणाम पाने के लिए बहुत अधिक प्रयास किए।
तीन हजार बाघों की तस्वीर कैद
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक किसी भी वन्यजीव सर्वेक्षण में निवेश किया गया यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रयास है। कैमरे ने कुल 3,080 बाघों (एक वर्ष से अधिक आयु) की तस्वीरों को कैद किया है।
बाघों की आबादी में हो रहा इजाफा
पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत में बाघों की न्यूनतम आबादी का अनुमान 3,167 है, जो बाघों की आबादी में उत्साहजनक वृद्धि को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बाघों की न्यूनतम आबादी 3,167 है, जो 2018 में 2,697 थी। शिवालिक और गंगा के बाढ़ के मैदानों के साथ-साथ मध्य भारत, पूर्वोत्तर पहाड़ियों-ब्रह्मपुत्र बाढ़ के मैदानों और सुंदरबन में बाघों की आबादी में काफी वृद्धि हुई है।