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कश्मीर से कन्याकुमारी तक थम्स अप ने शुरू की दिव्यांगों के विकास की अनूठी पहल

Mon, 28 Nov 2016 08:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पॉपुलर सॉफ्ट ड्रिंक्स ब्रांड थम्स अप ने 9 नबंबर को एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इसे थम्स अप वीर कश्मीर टू कन्याकुमारी (के टू के) नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य देश के लोगों को दिव्यांगों के प्रति जागरूक करना है। इस अभियान में दिव्यांग स्वयं की खोज के सफर पर निकले हैं। इस रैली का नेतृत्व भारत के पहले व्हीलचेयर टेनिस खिलाड़ी पद्मश्री बोनिफेस प्रभु करेंगे। बोनिफेस प्रभु साल 1998 में विश्व चैम्पियन भी रह चुके हैं। उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। 
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जम्मू-कश्मीर के गंगयाल में हिंदुस्तान कोका-कोला फैक्ट्री के जम्मू के डिविजनल कमिशनर श्री पवन कोटवाल ने इस यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड के (नॉर्थ) जोनल वाइस प्रेसीडेंट अभिषेक जुगरान भी मौजूद थे। बोनिफेस प्रभु यात्रा के दौरान छात्रों, शासकीय अधिकारियों और  सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं समेत हजारों व्यक्तियों से मिलेंगे। वह लोगों को दिव्यांगों की जरूरतों और उनके जीवन से जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में भी जानकारी देंगे।

यात्रा को रवाना करते वक्त अभिषेक जुगरान ने कहा, 'थम्स अप ने अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन और बीइंग ह्यूमन के साथ वीर कैंपेन शूरू किया है, जो दिव्यांगों को रोजगार के काबिल बनाएगा। सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन के जरिए हम कुछ खास पहलुओं पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जिससे दिव्यांगों को मुख्य धारा में शामिल करने में आसानी होगी। हमें बहुत खुशी है कि बोनिफेस थम्स अप वीर के टू के का नेतृत्व कर रहे हैं। 
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3500 किमी का सफर सड़क मार्ग से पूरा किया जाएगा

थम्स अप और अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस आभियान के अंतर्गत 50 कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 9 नवंबर से 9 दिसंबर के बीच 30 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में कश्मीर से कन्याकुमारी के बीच 3500 किमी का सफर सड़क मार्ग से पूरा किया जाएगा। यह यात्रा 14 शहरों से होकर गुजरेगी।  

यात्रा के दौरान रास्ते में मौजूद विभिन्न पड़ावों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को दिव्यांगों के संबंध में जागरूक किया जाएगा। इस जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य रूप से मूक-बधिरों के वार्तालाप में इस्तेमाल होने वाली सांकेतिक भाषा का प्रचार किया जाएगा। इस दौरान तकरीबन 10,000 लोगों को सांकेतिक भाषा सिखाई जाएगी साथ ही इसके संबंध में अन्य उपयोगी जानकारी दी जाएगी।  

साल 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लगभग ढाई करोड़ से अधिक दिव्यांग हैं। इनमें से सिर्फ 3 प्रतिशत दिव्यांगों को लाभप्रद रोजगार प्राप्त है। वहीं अन्य विकसित देशों में 30 से 50 प्रतिशत दिव्यांगों को रोजगार मिल जाता है। विश्व बैंक के मुताबिक दिव्यांगों को मुख्य धारा से बाहर रखने से अर्थव्यवस्था को 3 से 7 प्रतिशत की हानि होती है। थम्स अप वीर केटूके ऐसे दिव्यांगों को मुख्य धारा से जोड़ना चाहता है।
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भारत के विकास के लिए जरूरी है दिव्यांगों का विकास

थम्स अप वीर केटूके रोड एक्सपेडिशन के बारे में बोनिफेस प्रभु ने कहा, 'हम सब टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान दे रहे हैं। मुझे लगता है हम अपने सपनों के भारत का निर्माण तब तक नहीं कर सकते जब तक हम दिव्यांगों के कौशल और रोजगार की संभावनाओं को मजबूत नहीं करेंगे। 

जहां, एक तरफ हमें दिव्यांगों को मुख्य धारा में शामिल करना और उनके लिए अवसर पैदा करना है, वहीं दूसरी तरफ हमें दिव्यांगों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ उनकी जरूरतों का भी ध्यान रखना होगा।

इस तरह के कदम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मुझ पर थी कि मैं इसके लिए आगे आऊं। मुझे उम्मीद है कि यह अभियान सार्थक सिद्ध होगा। इस यात्रा में थम्स अप का सहयोग बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन, टाइम्स नाउ, इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान कोका-कोला और अन्य कई संस्थान कर रहे हैं।  
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