दिवाली पिछले एक साल से पटाखों के शौकीनों के लिए थोड़ी फीकी बीत रही है। हाई कोर्ट द्वारा पर्यावरण एवं प्रदूषण को मद्देनजर रख कर लिए गए फैसले के बाद पटाखों को पूरे देश में निषेध कर दिया गया है लेकिन दिल्ली में प्रदूषण कि अत्यंत खराब स्थिति के कारण कड़े नियम कानून अपनाये जा रहे हैं।
हाल ही में, पुलिस अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा कि, दिल्ली एनसीआर में किसी भी व्यापारी को पटाखे बेचने का लाइसेंस नहीं दिया जायेगा। हालांकि, दिल्ली एनसीआर में ग्रीन पटाखे इस्तेमाल किये जा सकते हैं। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मधुर वर्मा के अनुसार, किसी भी व्यापारी को पटाखे बेचने के लिए लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है।
साथ ही अस्थायी लाइसेंस मांगने वालों के पास ग्रीन पटाखे नहीं है और ये भी निश्चित है कि वे इतने कम समय में ग्रीन पटाखे का उपार्जन कर पाएंगे। पटाखों की बिक्री और उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने का निर्णय लिया है।
देश के विस्फोटक नियामक द्वारा प्रस्तावित शीर्ष अदालत और 2017 के एफिडेविट के स्पष्टीकरण के मुताबिक, ग्रीन पटाखे उन उत्पादों को संदर्भित करते हैं जिनमें बेरियम, एल्यूमीनियम और लौह जैसी धातुएं नहीं होतीं जो जहरीले गैसों को छोड़ती हैं।
इस फैसले के बाद, अदालत ने दोहराया कि बिना हानिकारक रसायनों वाले पटाखों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे व्यापारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच भ्रम पैदा हो गया क्योंकि पिछले साल की तरह इस बार बार पूरी तरह प्रतिबन्ध नहीं है।
उत्तर दिल्ली के सदर बाजार के व्यापारियों ने कहा कि प्रतिबंधों ने उनके लिए काला दिवाली बना दिया है, और दावा किया है कि घाटे करोड़ों रुपए में चल सकते हैं।पिछले साल सैकड़ों लोगों को अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए थे, जिसके बाद उनमें से प्रत्येक ने 5 लाख से ज्यादा के पटाखे खरीदे थे। आखिरी मिनट में पुलिस ने लाइसेंस रद्द कर दिया जिसके बाद काफी नुकसान हुआ।
लाइसेंसधारकों के अलावा, कई छोटी दुकानें हैं जो अवैध रूप से शहर में हर साल पटाखें बेचती हैं। लेकिन इस साल, हर पुलिस स्टेशन ने ऐसी बिक्री पर जांच करने के लिए ट्रैकिंग कि विशेष टीम बनाई है। शनिवार तक, शहर भर से करीब 1,900 किलोग्राम अवैध पटाखे जब्त किए गए थे, जिनमें से ज्यादातर पश्चिम दिल्ली से थे।