वित्तीय सुधारों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के बाद केंद्र सरकार की नजरें अब इंफ्रास्ट्रक्चर, संस्थागत और न्यायिक सुधार और नौकरियों के अवसर बनाने पर है, जिसके दम पर 2019 के चुनवों में ताल ठोक सके। इसके अलावा सरकार बिजनेस कानूनों में सुधार, श्रम कानून में आसानी और निवेश को बढ़ाने पर जोर देगी। वित्त मंत्री अरूण जेटली के अनुसार जीएसटी आने के बाद टैक्स रेट कम होगा और इस दिशा में तेजी से बढ़ा जा सकेगा।
नीति आयोग के तीन साल के ड्राफ्ट एक्शन प्लान में आगामी 3 सालों में सरकारी योजनाओं को ब्लूप्रिंट है। कई अधिकारियों ने कहा कि पुराने संस्थानों में मौजूदा जरूरतों के हिसाब बदलावों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में 19वीं सदी के हिसाब से काम नहीं हो सकता। संभव है कि इन संस्थानों में यूजीसी, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और एआईसीटीई जैसे संस्थान शामिल हो सकते हैं। हालांकि, नीति आयोग इस दिशा में पहले से ही सक्रिय है।