देश में कोरोना का प्रकोप जारी है, कई लोग लक्षण होने के बाद भी टेस्ट नहीं करा रहे हैं। ऐसे में बेंगलूरू में ढाई हजार रुपये में कोविड-19 के नेगेटिव के नकली सर्टिफिकेट बेचे जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये धंधा कथित तौर पर तीन महिलाओं की ओर से चलाया जा रहा है।
इन तीनों महिलाओँ में से एक महिला ब्रुहद बेंगलूरू महानगर पालिका में क्लीनिक चलाती है। बीबीएमपी की ओर से मंगलवार शाम को जारी किए गए बयान के मुताबिक, एक आशा कार्यकर्ता शांति और एक लैब टेक्नीशियन महालक्ष्मी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।
ये दोनों शैलजा नाम की डॉक्टर के साथ मिलकर कथित तौर पर नकली कोविड-19 नेगेटिव सर्टिफिकेट का व्यापार चला रही थीं। बीबीएमपी ने अपने बयान में कहा कि ये तीनों महिलाएं एक नकली सर्टिफिकेट के लिए 2,500 रुपये लेती थीं। निगम ने बताया कि शैलजा को कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर भर्ती किया गया था और इसके बाद बीबीएमपी ने डॉक्टर का कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया है।
निगम ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि ये तीनों महिलाएं लोगों का रैपिड एंटीजन टेस्ट करती थीं क्योंकि ये इनके लिए आसान और सुविधाजनक था। बयान में कहा गया कि रैपिड एंटीजन टेस्ट का सहारा लेकर यह महिलाएं पकड़े जाने पर रिपोर्ट को गलत ठहरा देती हैं।
बता दें कि रैपिड एंटीजन टेस्ट को उसके गलत नतीजों के लिए जाना जाता है। इसलिए उन महिलाओं के लिए इस टेस्ट के जरिए लोगों को ठगना आसान था। इनका यह भांडा तब फूटा, जब एक टीवी रिपोर्टर ने अपने कैमरे में रंगे हाथ इन महिलाओं को पकड़ा।
कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के सुधाकर ने एलान कर दिया कि राज्य सरकार ने इन तीनों महिलाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कर दी है। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों को जांच के लिए भेजा गया। जांच में पाया गया कि लैब टेक्नीशियन, महिला डॉक्टर और आशा कार्यकर्ता मिलकर लोगों को झूठी और नकली कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट दे रही थीं।
तुरंत कार्रवाई करते हुए इन महिलाओं के खिलाफ एफआईआर रजिस्टर कर दी गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।