कोरोना के पहले साल में 30 लाख से ज्यादा बच्चों ने समय से पहले जन्म लिया। साल 2020 में पूरी दुनिया में करीब 13.40 करोड़ बच्चों ने समय से पहले जन्म लिया है, जिन्हें प्रीमैच्योर यानी अपरिपक्व शिशु कहा जाता है।
यहां अपरिपक्व जन्म दर सबसे ज्यादा
बांग्लादेश 16.2 %
मलावी 14.5 %
पाकिस्तान 14.4 %
भारत 13.0 %
द. अफ्रीका 13.0 %
यहां अपरिपक्व बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा
भारत 30,16,700
पाकिस्तान 9,14,000
नाइजीरिया 7,74,100
चीन 7,52,900
इथियोपिया 4,95,900
इन श्रेणी पर गौर करते हैं डॉक्टर
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की प्रसूति रोग विभाग की डॉ. रेणुका मलिक बताती हैं कि 28 सप्ताह या उससे कम में पैदा हुए बच्चे को अत्यंत अपरिपक्व, 28 से 32 सप्ताह के बीच वालों को बहुत प्रीमैच्योर और 32 से 37 सप्ताह के बीच होने वाले शिशु को मध्यम अपरिपक्व की श्रेणी में रखा जाता है।
मां के लिए खतरे को देखते हुए कराया जाता है बच्चों का जन्म
भारतीय डॉक्टरों का मानना है कि कई बार मां के जीवन को खतरा होने की वजह से भी बच्चे का जन्म कराया जाता है। कोरोना की पहली लहर में ऐसे मामले बढ़ गए थे क्योंकि संक्रमण की वजह से मां और शिशु दोनों की जान जोखिम में थी। हालांकि, दुनिया में सबसे ज्यादा और सबसे जल्दी राष्ट्रीय कार्यक्रम भारत ने संचालित किए हैं। 2014 में देश में कुल नवजात गहन देखभाल इकाइयां (एनआईसीयू) 18 थीं लेकिन अब 700 से ज्यादा जिलों में इनकी संख्या 900 से अधिक है।
कई बच्चे नहीं देख पाते पांचवां जन्मदिन
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीरजा बताती हैं कि प्री मैच्योर बच्चों में जान का जोखिम काफी अधिक है। इनमें से कई बच्चे अपना पांचवा जन्मदिन भी नहीं देख पाते हैं। जो जीवित रह जाते हैं वह भी परेशानियों का सामना करते हैं।