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AI: अब एआई से चंद मिनटों में होगी कोरोना-हेपेटाइटिस की जांच, घर पर किया जा सकेगा परीक्षण

Wed, 10 May 2023 05:26 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक बहुत जल्द डॉक्टर के क्लीनिक तक पहुंच सकती है। फिर कुछ समय बाद गर्भावस्था परीक्षण की तरह यह तकनीक घर बैठे भी उपलब्ध हो सकेगी।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - फोटो : Istock
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिये वैज्ञानिकों ने हेपेटाइटिस सी और कोरोना की जांच करने वाले एक ही परीक्षण को और आसान बनाया है। एआई उपकरणों के जरिये यह आसान परीक्षण एक छोटी परखनली में कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक बहुत जल्द डॉक्टर के क्लीनिक तक पहुंच सकती है। फिर कुछ समय बाद गर्भावस्था परीक्षण की तरह यह तकनीक घर बैठे भी उपलब्ध हो सकेगी।

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सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में अमेरिका के फ्लोरिडा विश्वविद्यालय (यूएफ) में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर पीयूष जैन ने कहा, हम एक घर आधारित परीक्षण किट बनाने की कोशिश कर रहे हैं जिसका परिणाम लैब जैसे परीक्षण के समान विश्वसनीय है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सहारा लेते हुए साधारण परीक्षण विकसित करने चाहिए ताकि महंगे उपकरणों की आवश्यकता को समाप्त किया जा सके और 10 से 20 मिनट में मरीज को जांच का परिणाम दे सके।
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नई प्रणाली पर चल रहा काम
जैन ने बताया कि उनकी टीम वन-पॉट रिएक्शन के रूप में जानी जाने वाली एक ऐसी प्रणाली पर नवाचार कर रही है जिसे आरटी लैंप नाम से जानते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल भारत सहित दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों ने कोरोना महामारी में जांच के लिए किया था। इस तकनीक के जरिये घर बैठे कोरोना की जांच करने वाली किट भी बनाई गई थीं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि हेपेटाइटिस सी और कोरोना वायरस दोनों की जांच एक ही किट के जरिए संभव हो सकता है। इसी तरह का कार्य क्रिस्पर तकनीक के जरिए भी किया जा सकता है।

दो तकनीक से होगी जांच
शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर सैंपल में हेपेटाइटिस वायरस के जीनोम मौजूद होंगे तो उनका परीक्षण सकारात्मक परिणाम दिखाएगा। इस तकनीक के लिए 65.5 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है, जबकि क्रिस्पर तकनीक 37.7 डिग्री पर सबसे अच्छा काम करता है। हालांकि इन दोनों तकनीकों में यह अंतर परीक्षण को और जटिल बना सकता है। इसलिए डॉ. जैन की टीम इस अंतर को खत्म करने पर काम कर रही है।

कोरोना जांच में 97 फीसदी असरदार
इसी एंजाइम का विश्लेषण करने के लिए एआई उपकरणों का इस्तेमाल किया और पता लगाया कि वे इसे 65.5 डिग्री सेल्सियस पर कैसे जीवित रख सकते हैं? टीम ने हेपेटाइटिस सी और कोरोना वायरस दोनों के नमूनों पर इस तकनीक का परीक्षण सत्यापन किया है।

  • कोरोना के लिए यह तकनीक 97 फीसदी असरदार पाई गई जबकि हेपेटाइटिस सी को लेकर यह 95 फीसदी असरदार मिली है।
  • हालांकि अभी तक यह तकनीक हेपेटाइटिस सी वायरस के अन्य वेरिएंट की पहचान नहीं कर पा रही है जिसे लेकर वैज्ञानिकों की टीम अभी कार्य कर रही है।
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