जयराम रमेश ने चुटकी लेते हुए कहा, पतंजलि के नाम विश्वविद्यालय को लेकर मैं सहमति नहीं हूं। जिस तरह केंद्रीय विश्वविद्यालयों में जेएनयू और इलाहाबाद विवि को ध्वस्त कर दिया गया है इन्हें भी केंद्रीय विवि बनाने से स्वरूप बदल जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के बजाय यहां संस्कृत के विद्वान को कुलपति बनाया जाए।
टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर राय ने विधेयक का समर्थन करते हुए संस्कृत में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 2011 की जनगणना में सामने आया है कि देश के कुछ राज्यों में दो हजार लोग संस्कृत बोलते हैं। राजनीति और भाषाएं हमेशा आपस में जुड़ी रही हैं। विधेयक पूरी तरह से राजनीतिक है। हम चाहते हैं संस्कृत को भाषा के तौर पर बढ़ावा मिले। हम देखेंगे कि बिना किसी राजनीतिक षड्यंत्र या प्रयास के किस तरह संस्कृत की सुरक्षा और संरक्षण होगी। उन्होंने आदि शंकराचार्य का जिक्र करते हुए सरकार पर कटाक्ष किया कि धन और सत्ता पर घमंड नहीं करना चाहिए।
12 तक पढ़ी संस्कृत : राम गोपाल यादव
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि उन्होंने 12वीं तक संस्कृत पढ़ी है। विधेयक का समर्थन करते हुए उन्होंने इसमें संस्कृत विश्वविद्यालयों में प्रवक्ताओं की भर्ती का प्रावधान न होने पर सवाल उठाया। उन्होंने स्टूडेंट काउंसिल की जगह स्टूडेंट यूनियन ही बनाने और इसका चयन छात्रों के माध्यम से ही कराने की मांग की। उन्होंने चुटकी ली कि छात्र राजनीति से ही विचारधारा वाले बेहतर विधायक और सांसद आते हैं विश्वविद्यालयों राजनेताओं की नर्सरी है नहीं तो मध्यप्रदेश जैसे हालात होते हैं।
संस्कृति और सभ्यता को बढ़ावा मिलेगा
जदयू सांसद कहकशा परवीन ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा, केंद्रीय दर्जा मिलने से इन विश्वविद्यालयों में सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। बिहार के मंडन मिश्र और भारती ने भी संस्कृत के उत्थान के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने शंकराचार्य और मंडन मिश्र की पत्नी के बीच हुए शास्त्रार्थ का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार से इसी तर्ज पर बिहार के अरबी-फारसी संस्थान को भी केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग की।
भाषाओं को जाति व संप्रदाय से न जोड़ा जाए
हिंदी, संस्कृत या उर्दू आदि भाषाएं हिंदुस्तान की हैं। इन्हें किसी जाति या संप्रदाय में नहीं बांधना चाहिए। उर्दू को सिर्फ मुसलमानों से नहीं जोड़ना चाहिए।
- जया बच्चन, सपा सांसद