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मणिपुर हिंसा: कोबरा-आरएएफ सहित सीआरपीएफ की तीन दर्जन कंपनियां होंगी तैनात, फिलहाल मौजूद हैं 21000 जवान

सार

मणिपुर में जारी हिंसा पर काबू पाने, हथियारबंद समूहों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए केंद्र सरकार अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने की तैयारी कर रही है। योजना के तहत सीआरपीएफ, कोबरा कमांडो और दंगा नियंत्रण बल  आएएएफ की कंपनियों के साथ सामान्य ड्यूटी वाली कंपनियां भी भेजी जाएंगी।
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मणिपुर हिंसा को नियंत्रित करते सुरक्षा बल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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मणिपुर में हो रही हिंसा के मद्देनजर, केंद्र सरकार वहां पर अतिरिक्त संख्या में फोर्स की तैनाती करने जा रही है। हथियारबंद समूहों और उपद्रवियों पर नकेल कसने व सर्च अभियानों को गति देने के मकसद से सीआरपीएफ एवं इसकी विशेष इकाई 'कोबरा', जिसे जंगल वॉरफेयर में खासी महारत हासिल है व दंगारोधी बल 'आरएएफ' को मणिपुर के लिए रवाना किया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, इनमें 'कोबरा और आरएएफ की एक-एक कंपनी व तीस 'जीडी' यानी सामान्य कंपनियां शामिल हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तैनात सीआरपीएफ की सौ कंपनियों में से भी कुछ कंपनियां, मणिपुर भेजी जाएंगी। 

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सीआरपीएफ के 21 हजार जवान तैनात हैं  
बता दें कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हथियारबंद समूहों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशनों को तेज करने के लिए केंद्रीय बलों को मणिपुर में तैनात किया गया है। जंगल वॉरफेयर में एक्सपर्ट 'कोबरा' कमांडो की दो बटालियनों को मई के आखिरी सप्ताह में मणिपुर के लिए रवाना किया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पुलिस-2 डिवीजन द्वारा कोबरा की दो बटालियनों को मणिपुर भेजने के प्रपोजल को मंजूरी दी गई थी। इस बाबत खुद सीआरपीएफ ने मणिपुर में ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए यह प्रपोजल दिया था। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद कोबरा की दो बटालियनों को मणिपुर के लिए रवाना कर दिया गया। वहां पर मौजूदा समय में सीआरपीएफ के लगभग 21 हजार जवान तैनात हैं। 

नई प्लानिंग के तहत हो रहा काम
मणिपुर में तैनात सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ, असम राइफल और लोकल पुलिस के बीच बेहतर समन्वय करने के लिए नई प्लानिंग के तहत काम हो रहा है। उपद्रवियों के खिलाफ संयुक्त ऑपरेशन शुरू किए गए हैं। अवैध हथियारों की बरामदगी के लिए राज्य में लगातार तलाशी अभियान प्रारंभ किया गया है। म्यांमार से लगते मणिपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठियों पर नकेल कसी जा रही है। ड्रग माफिया पर भी बड़ा प्रहार करने की योजना बनाई गई है। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों और दूसरे महत्वपूर्ण मार्गों पर अवैध वसूली को रोकने के लिए अलग से टीमों का गठन किया गया है। राजमार्ग को रोक देना या तेल टैंकरों से जबरन वसूली, इसके लिए केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस को मिलाकर एक विशेष टॉस्क फोर्स का गठन किया जा रहा है। 
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उपद्रवियों/उग्रवादी समूहों का होगा सरेंडर
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की तरह मणिपुर में भी कम दूरी पर एफओबी यानी 'फारवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। ऐसे स्थानों की पहचान कर ली गई है, जहां पर एफओबी स्थापित किए जाने हैं। ऐसे में वहां पर उग्रवादी समूहों की दोतरफा घेराबंदी होगी। एक बॉर्डर एरिया से उग्रवादियों की सप्लाई चेन खत्म की जाएगी। दूसरा, आंतरिक क्षेत्रों में एफओबी के जरिए सुरक्षा बल, उग्रवादियों की कमर तोड़ेंगे। इससे उग्रवादियों को कहीं छिपने की जगह नहीं मिल सकेगी। भारत-म्यांमार बॉर्डर के सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन तलाशी अभियान चला जा रहा है। 

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9.214 किमी क्षेत्र में है फेंसिंग
भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 1643 किलोमीटर है। अभी तक वहां 9.214 किमी क्षेत्र में ही फेंसिंग लग सकी है। बॉर्डर का बाकी हिस्सा अभी तक खाली है। पिछले साल लगभग 30000 करोड़ रुपये की लागत से फेंसिंग लगाने का काम प्रारंभ किया गया है। यह काम 10 वर्ष में पूरा होगा। इसके साथ ही बॉर्डर पर हाइब्रिड निगरानी प्रणाली (एचएसएस) के माध्यम से बाड़ लगाने की दो पायलट परियोजनाएं भी चल रही हैं। इसके तहत अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में एक-एक किलोमीटर के हिस्से पर बाड़ लगाई जा रही है। मणिपुर में लगभग 20 किलोमीटर के क्षेत्र में बाड़ लगाने के कार्य को मंजूरी मिल चुकी है।

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