मरूद्यान में हुए बदलावों ने दुनिया भर में लगभग 3.4 करोड़ लोगों को प्रभावित किया है। शोध के मुताबिक मरूद्यान दुनिया के सूखे हिस्सों में लोगों, पौधों और जानवरों के लिए पानी के अहम स्रोत हैं, जो रेगिस्तानों में उत्पादकता और जीवन जीने की राह दिखाते हैं।
जलवायु परिवर्तन और मानवजनित गतिविधियों से मरुद्यानों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। 1995 से 2020 तक दुनियाभर के मरुस्थलीय क्षेत्रों में 2,20,149 वर्ग किलोमीटर से अधिक की वृद्धि हुई। इसका मुख्य कारण एशिया में जानबूझकर किए गए मरुस्थलीय क्षेत्रों का विस्तार हैं। एक नए शोध से पता चला है कि पिछले 25 सालों में दुनिया के मरूद्यान सिकुड़कर रेगिस्तान में तब्दील हो रहे हैं। अध्ययन अर्थ्स फ्यूचर में प्रकाशित हुआ है।
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शोधकर्ताओं ने दुनिया भर में मरूद्यान के फैलने और बदलावों को समझने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के जलवायु परिवर्तन लैंड कवर परियोजना से आंकड़ों का उपयोग किया। टीम ने भूमि की सतह को सात श्रेणियों में वर्गीकृत किया। इनमें वन, घास के मैदान, झाड़ी, फसल भूमि, पानी, शहरी इलाका और रेगिस्तान शामिल हैं। इन आंकड़ों का उपयोग करके शुष्क भूमि वाले हिस्सों के भीतर वनस्पति वाले क्षेत्रों की तलाश की गई। यानी मरूद्यानों की खोज की गई और 25 वर्षों के दौरान इनमें हुए बदलावों पर नजर रखी गई। हरियाली में बदलाव ने भूमि उपयोग और मरूद्यान के स्वास्थ्य में हो रहे बदलाव का संकेत दिया।
विश्व में 3.4 करोड़ लोग प्रभावित
मरूद्यान में हुए बदलावों ने दुनिया भर में लगभग 3.4 करोड़ लोगों को प्रभावित किया है। शोध के मुताबिक मरूद्यान दुनिया के सूखे हिस्सों में लोगों, पौधों और जानवरों के लिए पानी के अहम स्रोत हैं, जो रेगिस्तानों में उत्पादकता और जीवन जीने की राह दिखाते हैं।
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संरक्षण जरूरी
अध्ययन में स्वस्थ मरूद्यानों को बनाए रखने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया है। इसमें जल संसाधन प्रबंधन में सुधार, टिकाऊ भूमि उपयोग, प्रबंधन को बढ़ावा देने और जल संरक्षण और कुशल उपयोग को प्रोत्साहित करने के सुझाव शामिल हैं। यह प्रयास विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जलवायु में लगातार बदलाव हो रहा है। इनका संरक्षण समग्र प्राकृतिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।