बाला साहेब ठाकरे
दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे का निधन 17 नवंबर 2012 को मुंबई में हुआ था। उनकी अंतिम यात्रा में लाखों की संख्या में मुंबईवासी, राजनेता, शिव सैनिक, बॉलिवुड और उद्योग जगत के लोग शामिल हुए थे। उनकी अंतिम यात्रा उनके बांद्रा स्थित आवास से शुरू होकर सेना भवन पहुंची थी। जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंत्येष्टि के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि लाखों की संख्या में लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। महाराष्ट्र में ठाणे, रायगढ़, पुणे, औरंगाबाद तथा कोंकण क्षेत्र से हजारों की संख्या में शिव सैनिक पहुंचे थे।
उनकी अंतिम यात्रा में करीब 2 लाख लोग साथ-साथ चले थे। जगह-जगह लोग घर की छतों, पेड़, पानी की पाइप पर चढ़कर उनकी एक झलक पाने की कोशिश करते दिखाई दिए थे। सबसे हैरानी की बात तो ये थी कि उनकी अंतिम यात्रा में माहिम पहुंचने पर बहुत सी मुस्लिम महिलाएं भी रो रही थीं। वहीं चर्च जाने वाले लोग भी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए थे। 86 वर्ष के ठाकरे का शव शीशे के बॉक्स में फूलों से सजे खुले ट्रक पर रखा गया था।
21 मई 1991 की काली शाम जब लिट्टे समर्थकों ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची ही नहीं बल्कि उनकी हत्या में कामयाब भी हुए। राजीव की हत्या देश के लिए बहुत बड़ा सदमा थी। जिसने भी उनके मारे जाने की खबर सुनी विश्वास ही नहीं कर पाया। उनकी शवयात्रा में शामिल होने के लिए दिल्ली में लाखों की संख्या में लोग पहुंचे थे, हर किसी के जुबां पर बस एक ही बात थी काश यह झूट होता। 24 मई को जब उनकी शवयात्रा निकाली गई तब चारों ओर चीख पुकार मची हुई ती देश ने एक महानायक को खोया था। उनकी शवयात्रा में शामिल होने के लिए सुदूर गांवों से भी लोग पहुंचे थे।